KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

माता मेरी भाग्य विधाता

दिनांक 08/05/21
मातृ दिवस पर विशेष
*विधा – चौपाई*
*विषय – माता*
*प्रसव वेदना सहकर माता*

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माता    मेरी    भाग्य    विधाता




जिसकी दुनिया एक पहेली।
होती सच्ची मातु सहेली ।।
धरणी सी मॉं दुख है सहती।
शिशु की सकल पीर है हरती।।

प्रसव वेदना सहकर माता।
शिशु की बनती जीवनदाता।।
देती हमको नूतन काया।
नेह भरी नव शीतल छाया।।

मॉं की आँचल सुख की छाया।
जिसको ढककर दूध पिलाया।।
गीले बिस्तर पर मॉं सो कर।
नींद चैन को अपना खोकर।।

पाल पोषकर योग्य बनाती ।
पढ़ा लिखाकर भाग्य जगाती।।
माता की सब करना सेवा ।
पाने जीवन में शुचि मेवा।।

माता मेरी भाग्य विधाता ।
बनी प्रथम गुरु जग की माता।।
मॉं नित देती अविचल शिक्षा।
गहन ज्ञान की देती दीक्षा।।

सदा सिखाती सद्गुण सारे।
देकर सद्गुण दुर्गुण टारे।।
माता मेरी भाग्य सँवारे।
हम सब उनकी राज दुलारे।।


पद्मा साहू “पर्वणी”
खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़

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