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मच्छर पर कविता

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मच्छर पर कविता

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बचना मच्छर काट से,मानो मेरी बात
मच्छरदानी को लगा,नींद पड़े दिन रात।।
नींद पड़े दिन रात,हटे बाधा तब सोना।
स्वच्छ रहे घर द्वार,साफ हो कोना कोना।।
मलेरिया से दूर,सुरक्षा घेरा रचना।
उड़ते मक्खी कीट,सदा इनसे तुम बचना।।

पानी आँगन में भरे,बाहर उसको फेंक।
मच्छर का लार्वा बढ़े,बीमारी की टेक।।
बीमारी की टेक,गंदगी बढ़ता जाता।
मलेरिया ज्वर खूब,रोग धीरे से आता।
आस पास हो स्वच्छ,रहे घर मच्छरदानी।
नाली करना साफ,दूर हो गंदा पानी।।

राजकिशोर धिरही

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