मिल मस्त हो कर फाग में

संयुत छंद “फाग रस”

सब झूम लो रस राग में।
मिल मस्त हो कर फाग में।।
खुशियों भरा यह पर्व है।
इसपे हमें अति गर्व है।।
यह मास फागुन चाव का।
ऋतुराज के मधु भाव का।।
हर और दृश्य सुहावने।
सब कूँज वृक्ष लुभावने ।।
मन से मिटा हर क्लेश को।
उर में रखो मत द्वेष को।।
क्षण आज है न विलाप का।
यह पर्व मेल-मिलाप का।।
मन से जला मद-होलिका।
धर प्रेम की कर-तूलिका।।
हम मग्न हों रस रंग में।
सब झूम फाग उमंग में।।
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लक्षण छंद
“सजजाग” ये दश वर्ण दो।
तब छंद ‘संयुत’ स्वाद लो।।
“सजजाग” = सगण जगण जगण गुरु
112 121 121 2 = 10 वर्ण
चार चरण। दो दो समतुकांत
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बासुदेव अग्रवाल ‘नमन’
तिनसुकिया
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बासुदेव अग्रवाल 'नमन'

परिचय -बासुदेव अग्रवाल 'नमन' नाम- बासुदेव अग्रवाल; शिक्षा - B. Com. जन्म दिन - 28 अगस्त, 1952; निवास स्थान - तिनसुकिया (असम) रुचि - काव्य की हर विधा में सृजन करना। हिन्दी साहित्य की हर प्रचलित छंद, गीत, नवगीत, हाइकु, सेदोका, वर्ण पिरामिड, गज़ल, मुक्तक, सवैया, घनाक्षरी इत्यादि। हिंदी साहित्य की पारंपरिक छंदों में विशेष रुचि है और मात्रिक एवं वार्णिक लगभग सभी प्रचलित छंदों में काव्य सृजन में सतत संलग्न हूँ। परिचय - वर्तमान में मैँ असम प्रदेश के तिनसुकिया नगर में हूँ। whatsapp के कई ग्रुप से जुड़ा हुआ हूँ जिससे साहित्यिक कृतियों एवम् विचारों का आदान प्रदान गणमान्य साहित्यकारों से होता रहता है। इसके अतिरिक्त हिंदी साहित्य की अधिकांश प्रतिष्ठित वेब साइट में मेरी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। सम्मान- मेरी रचनाएँ देश के सम्मानित समाचारपत्रों में नियमित रूप से प्रकाशित होती रहती है। हिंदी साहित्य से जुड़े विभिन्न ग्रूप और संस्थानों से कई अलंकरण और प्रसस्ति पत्र नियमित प्राप्त होते रहते हैं। Blog - https://www. nayekavi.blogspot.com