KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook

@ Twitter @ Youtube

मनीभाई के हाइकु

0 132

मनीभाई के हाइकु


मानवाधिकार
जब जग ने जाना
राष्ट्र संयुक्त।


वैश्विक ताप
संकट में है राष्ट्र
सुधरो आप।


विश्व की शांति
पृथ्वी की सुरक्षा
आतंक मिटा।


अस्त्र की होड़
विकास या विनाश
अंधे की दौड़।


भारत आया
रंग भेद खिलाफ
संसार जागा।


चुनौती देता
पर्यावरण रक्षा
हे राष्ट्र!जुड़ो।

7

“मैं” और “तुम”
खींच गई लकीर
चलो “हम” हों।
8

अस्त्र होती है
हिंसा की प्रतिमूर्ति
लेती हैं शांति।

9

अस्त्र करती
हिंसा प्रतिबाधित
देती हैं शांति।

10

धर्म संकट
अंधायुग में ज्योति
युयुत्सु गति।

11

आत्महत्याएं
है असमाजिकता
संभल जाओ।

12

हैं आत्महत्या
समाजिक बंधन
घातक रोग।

13

अनिच्छा जीना
निरूद्देश्य घूमना
ज्यों आत्मघात।

14

गिद्ध विलुप्त~
मानव ने धर ली
उनका रूप।

✍मनीभाई”नवरत्न”

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.