KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

Register/पंजीयन करें

Login/लॉग इन करें

User Profile/प्रोफाइल देखें

Join Competition/प्रतियोगिता में हिस्सा लें

Publish Your Poems/रचना प्रकाशित करें

User Profile

नारी चेतना पर लघु कविता

0 156

नारी चेतना पर लघु कविता

ऐ! नारी
तू करती है अराधना
उन अराध्यों की
जो हैं तेरे दोषी
किया शोषण सदैव
जिन्होंने तेरा

समझा तुझे
श्रंगार-रस की
विषय-वस्तु
नहीं दिया हक
समानता का
किया सदैव भेदभाव

गवाह हैं इस सबके
अनेक धर्म-ग्रंथ
जो चीख-चीख कर
करते हैं ब्यान
तेरे शोषण की कहानी

-विनोद सिल्ला©

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.