Join Our Community

Publish Your Poems

CLICK & SUPPORT

नारी चेतना पर कविता

0 303

नारी चेतना पर कविता

ऐ! नारी
तू करती है अराधना
उन अराध्यों की
जो हैं तेरे दोषी
किया शोषण सदैव
जिन्होंने तेरा

CLICK & SUPPORT

समझा तुझे
श्रंगार-रस की
विषय-वस्तु
नहीं दिया हक
समानता का
किया सदैव भेदभाव

गवाह हैं इस सबके
अनेक धर्म-ग्रंथ
जो चीख-चीख कर
करते हैं ब्यान
तेरे शोषण की कहानी

-विनोद सिल्ला©

Leave A Reply

Your email address will not be published.