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नारी शक्ति को बधाई

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नारी शक्ति को बधाई

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परन्तु उन नारियों को नहीं
जो बेटी और बहु में फर्क समझती हैं
जो हर दूसरी नारी को
पुरुष की तुलना में कमज़ोर
और पुरुषों की सेवक मात्र समझती हैं
जो महिलाओं के पहनावें से
उनके चरित्र का आंकलन करती हैं
उन्हें तो बिल्कुल नहीं
जो दहेज के मापदंड पर
बहुओं का भविष्य निर्धारित करती हैं
उन नारियों को मैं क्या बधाई दूँ
जो अब तक
पुरुष प्रधान मानसिकता में ही जी रही हैं
मेरी बधाई उस महिला शक्ति को है
जो जेट विमान लेकर
शत्रु के घर मे घुसकर उसको मारती है
जो पति के धोखा देने पर
टूट के बिखरती नहीं
अपितु बढ़ चढ़ कर
अपनी काबिलियत प्रस्तुत करती है
वो नारी जो आज वैज्ञानिक है
अध्यापिका है संगीतकार है
नृत्यांगना है नाटककार है इत्यादि
जो हर वो कार्य करने में सक्षम है
जो पुरुष कर सकता है
वो नारी जो प्रत्येक नारी की
भावनाओं और आकांक्षाओं का सम्मान करें
वो नारी जो उत्पीड़न का
खुल के विरोध कर सके
वो नारी जो माँ है
वो माँ
जो सिर्फ एक नए जीवन को
जन्म ही नहीं देती
बल्कि अच्छे संस्कारों से
अपनी संतान को धर्म और कर्म का
उचित मार्ग दिखाती है
मेरी बधाई हर उस नारी को है
जो ईश्वर के दिये इस जीवन को
अपनी मौलिकताओं और
अपनी महत्वाकांशाओं के अनुरूप
जीने को लालायित है
यकीनन आज उस नारी को बधाई देती हूँ
इक परिवार और समाज में
प्रेम के अंतरंग रूपों को बिखेरती है
मां, बहन,पत्नी,
बेटी,सास, बहु,
दादी ,नानी,
बुआ, चाची, ताई,
मासी, मामी होने के साथ साथ
एक ज़िम्मेदार नागरिक भी है
जिसकी ‘चाहत’
पारिवार और समाज तक ही
सीमित न हो
जो राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत भी हो
वह नारी जो कहीं न कहीं
किसी न किसी रूप में
राष्ट्र का गौरव बढ़ाती है
ऐसी नारी शक्ति को मेरा नमन
व हार्दिक बधाई।

नेहा चाचरा बहल ‘चाहत’
झाँसी

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