Join Our Community

Publish Your Poems

CLICK & SUPPORT

नीम-हकीम खतरा-ए-जान

0 258

नीम-हकीम खतरा-ए-जान

आए बिल्ली जब
बंद कर लेते हैं आँखें
सभी कबूतर
ताकि टल जाए संकट
आँखें बंद नहीं
लाइट बंद करने के
आदेश हैं साहब के
लेकिन साहब
हम कबूतर नहीं
और वो भी बिल्ली नहीं

CLICK & SUPPORT

नीम-हकीम खतरा-ए-जान
पुख्ता इंतजाम कीजिए
इसे गंभीरता से लीजिए
टौने-टोटके हम
बाद में कर लेंगे
फिलहाल तो
कोई रणनीति बनाइए
संकट से उबरने की

विनोद सिल्ला©

Leave A Reply

Your email address will not be published.