दुर्गा मैया पर गीत – आषीश कुमार

दुर्गा मैया पर गीततेरे रूप अनेक हैं मैयाहर रूप में हमको भाती होनवरात्रि में नौ दुर्गा रुप मेंहम पर ममता लुटाती होतीनो लोक हैं काँपे तुमसेजब शक्ति रूप धरती होचण्‍ड-मुण्‍ड…

0 Comments
श्रावण कृष्ण पंचमी नागपंचमी Shravan Krishna Panchami Nagpanchami
श्रावण कृष्ण पंचमी नागपंचमी Shravan Krishna Panchami Nagpanchami

नागपंचमी पर हिन्दी कविता

नागपंचमी पर हिन्दी कविता श्रावण कृष्ण पंचमी नागपंचमी Shravan Krishna Panchami Nagpanchami गीत- उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट नाग पंचमी के अवसर पर, नागों का पूजन कर आएँआस्तीन में नाग छिपे जो,…

0 Comments
शिव स्तुति
शिव स्तुति, भजन , अनिल कुमार गुप्ता "अंजुम"

शिव महाकाल पर कविता – बाबू लाल शर्मा

हे नीलकंठ शिव महाकाल भक्ति गीत- हे नीलकंठ शिव महाकाल (१६,१४मात्रिक) हे नीलकंठ शिव महाकाल,भूतनाथ हे अविनाशी!हिमराजा के जामाता शिव,गौरा के मन हिय वासी!देवों के सरदार सदाशिव,राम सिया के हो…

0 Comments
बचपन
मुझे वो अपना गुजरा ज़माना याद आया, कविता, अनिल कुमार गुप्ता "अंजुम" -

आ बैठे उस पगडण्डी पर – बाबू लाल शर्मा

आ बैठे उस पगडण्डी पर - बाबू लाल शर्मा HINDI KAVITA || हिंदी कविता आ बैठे उस पगडण्डी पर,जिनसे जीवन शुरू हुआ था।बचपन गुरबत खेलकूद में,उसके बाद पढ़े जमकर थे।रोजगार…

0 Comments

स्वर्ण की सीढ़ी चढी है – बाबू लाल शर्मा

स्वर्ण की सीढ़ी चढी है - बाबू लाल शर्मा चाँदनी उतरी सुनहलीदेख वसुधा जगमगाई।ताकते सपने सितारेअप्सरा मन में लजाई।।शंख फूँका यौवनों मेंमीत ढूँढे कोकिलाएँसागरों में डूबने हितसरित बहती गीत गाएँपोखरों…

0 Comments

गुलमोहर है गुनगुुनाता – बाबू लाल शर्मा

गुलमोहर है गुनगुुनाता - बाबू लाल शर्मा गुलमोहर है गुनगुुनाता,अमलतासी सी गज़ल।रीती रीती सी घटाएँ,पवन की अठखेलियाँ।झूमें डोलें पेड़ सारे,बालियाँ अलबेलियाँ।गीत गाते स्वेद नहाये,काटते हम भी फसल।गुलमोहर है गुनगुनाता,अमलतासी सी…

0 Comments

इक शिखण्डी चाहिए – बाबू लाल शर्मा

इक शिखण्डी चाहिए - बाबू लाल शर्मा पार्थ जैसा हो कठिन,व्रत अखण्डी चाहिए।*आज जीने के लिए,**इक शिखण्डी चाहिए।।*देश अपना हो विजित,धारणा ऐसी रखें।शत्रु नानी याद कर,स्वाद फिर ऐसा चखे।सैन्य हो…

0 Comments

प्रीत शेष है मीत धरा पर

नवगीत- प्रीत शेष है मीत धरा पर प्रीत शेष है मीत धरा पररीत गीत शृंगार नवल।बहे पुनीता यमुना गंगापावन नर्मद नद निर्मल।।रोक सके कब बंधन जल कोकूल किनारे टूट बहेआँखों…

0 Comments

आज पंछी मौन सारे

आज पंछी मौन सारे नवगीत (१४,१४) देख कर मौसम बिलखताआज पंछी मौन सारेशोर कल कल नद थमा हैटूटते विक्षत किनारे।।विश्व है बीमार या फिरमौत का तांडव धरा परजीतना है युद्ध…

0 Comments

इंद्रधनुष के रंग उड़े हैं

इंद्रधनुष के रंग उड़े हैं इन्द्र धनुष के रंग उड़े हैं. देख धरा की तरुणाई।छीन लिए हाथों के कंगन. धूम्र रेख नभ में छाई।।सुंदर सूरत का अपराधी. मूरत सुंदर गढ़ता…

0 Comments