कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

शिक्षक पर कविता

समाज और यथार्थ

भारत के गुरुकुल, परम्परा के प्रति समर्पित रहे हैं। वशिष्ठ, संदीपनि, धौम्य आदि के गुरुकुलों से राम, कृष्ण, सुदामा जैसे शिष्य देश को मिले। डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप

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माँ शारदे पर कविता

हिंदी कविता

माँ शारदे पर कविता सृजनता का आधार दे।मुझको ऐसा ज्ञान दे । अंधकार को दूर मिटा के।ज्ञान का प्रकाश दे । नमन् करूँ मै माँ शारदे को ।मुझको नित ही ज्ञान मिले ।ज्ञान,विद्या,संगीत, कला । अधिष्ठात्री देवी का वर मिले।वीणा,पुस्तक,माला धारिणी ।नित्य मैं करुँ चरण वंदना ।बर्ह्मलोक विराजे,हंसवाहिनी श्वेतपद्मासना । नित्य करूँ मैं नमन तुमको।विद्या,बुद्धि,वक

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श्रमिक-विकास की बुनियाद पर कविता

हिंदी कविता

श्रमिक-विकास की बुनियाद पर कविता सूरज की पहली किरण से काम पर लग जाता हूँ।ढलते सूरज की किरणों संग वापस घर को आता हूँ।अपने घर परिवार के लिए,शरीर की चिंता छोड़ मैं।हवा,पानी,धूप,छांह को हँसकर सह जाता हूँ।।1।। नव निर्माण,नव विहान की शुरुआत हूँ मैं।देश के विकास की पहली ईंट बुनियाद हूँ मैं।सोचता हूँ गढ़ रहा

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mahatma gandhi

गांधी जी के सपनों पर कविता

समाज और यथार्थ

गांधी जी के सपनों पर कविता गांधीजी के सपनों का है ये भारत,उन्नत होकर विकसित होता ये भारत।ग्रामीण परिवेश में जागरूकता बढ़ाया,स्वदेशी अपनाकर अभियान चलाया।। आर्थिक सामाजिक न्याय बताकर,गाँव के विकास को समझाया।व्यापकता की दृष्टि फैलाकर,जाति,धर्म,भाषा के भेदभाव को मिटाया।। नर-नारी को समानता दिलाकर,जीवन जीने का ढंग बताया।आमजनों को शिक्षा देकर,मानव चेतना को जागृत कराया।।

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वाह रे कोरोना से हालत पर कविता

हिंदी कविता

कोरोना से हालत पर कविता वाह रे , कोरोना ! तूने तो गजब कर डाला ,छोटी सोच और अहंकार को ,तूने चूर-चूर कर डाला ।।वाह रे , कोरोना ! …… पैसो से खरीदने चले थे दुनिया ,ऐसे नामचीन पड़े है होम आईसोलोशन में ,तूने तो पैसो को भी , धूल-धूल कर डाला ।।वाह रे ,

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नित्य करूँ मैं वंदना

हिंदी कविता

नित्य करूँ मैं वंदना नित्य करूँ मैं वंदना,गुरुवर को कर जोर।पाऊँ चरणों में जगह ,होकर भाव विभोर।। मात-पिता भगवान हैं,करना वंदन रोज।इन देवों को छोड़कर,करते हो क्या खोज? जिनके आशीर्वाद से ,हुआ सफल हर काम।करता हूँ नित वंदना,मात-पिता के नाम।। धरती माँ की वंदना,यह ही जग में सार।सबको समान जानकर,करती हैं उपकार।। प्रेम भाव से

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मौत की खबर पर कविता

हिंदी कविता

मौत की खबर पर कविता यूं ही मै गरल पीता रहा,चारदीवारी में गुनता रहा।नजर बंद हो अपने घर में,मौत खबर सब सुनता रहा। अपनों से अपने भी दूर हैं,काँधा भी नहीं मजबूर हैं।दूना कर गए ओ जगत को,अस्थियां उनके चुनता रहा।नजर बंद हो अपने घर में,मौत खबर सब सुनता रहा। छीनी किसने उनकी साँसें,उजड़ गई

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Jai Sri Ram kavitabahar

श्रीराम पर कविता / डॉ एन के सेठी

प्रकृति और पर्यावरण

श्रीराम पर कविता / डॉ एन के सेठी मर्यादा श्री राम की, जीवन में अपनाय।अहंभाव को त्यागकर,सदा नम्र बन जाय।।1।। सेवक हो हनुमान सा,होय न हिम्मत हार।लाय पहाड़ उठायके, करें दुखों से पार।।2।। अंत दशानन का हुआ, हुई राम की जीत।अहं भाव को त्यागकर, करो राम से प्रीत।।3।। रामचरित से सीख लें, संबंधों का मान।करें

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हकीकतों पर कविता

हिंदी कविता

हकीकतों पर कविता परिवर्तन के इसदौर मेंमैं एक ऐसे मोड़पर खड़ा हूंजहां से मुझे एकनिर्णायक निर्णयलेना हैपरंतुकुछ निर्णयलेने के पूर्वउन हकीकतों सेभी मुंह मोड़नामुझे मंजूर नहीं।।।

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नौका पर कविता

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नौका पर कविता मँझधारों में माँझी अटका,क्या तुम पार लगाओगी।जर्जर नौका गहन समंदर,सच बोलो कब आओगी। भावि समय संजोता माँझीवर्तमान की तज छाँयाअपनों की उन्नति हित भूलाजो अपनी जर्जर कायाक्या खोया, क्या पाया उसनेतुम ही तो बतलाओगी।जर्जर ………………. ।। भूल धरातल भौतिक सुविधाभूख प्यास निद्रा भूलारही होड़ बस पार उतरनाकल्पित फिर सुख का झूलाआशा रही

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पंछी पर कविता

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पंछी पर कविता यह,मन प्यासा,पंछी मेरानील गगन उड़ करे बसेरा ।पल मे देश विदेशों विचरण,कभी रुष्ट,पल मे अभिनंदन,*प्यासा पंछी, उड़ता मन।।* पल में अवध,परिक्रम करता,सरयू जल अंजुलि में भरता।पल में चित्र कूट जा पहुँचे,अनुसुइया के आश्रम पावन,*प्यासा पंछी, उड़ता मन।।* पल में शबरी आश्रम जाए,बेर,गुठलियाँ ढूँ ढे खाए।किष्किन्धा हनुमत से मिलकर,कपि संगत वह करे जतन,*प्यासा

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पुस्तक पर दोहे – डॉ एन के सेठी

हिंदी कविता

यह विभिन्न श्रेणियों के अर्न्तगत हिंदी, अंग्रेजी तथा अन्य प्रमुख भारतीय भाषाओँ एवं ब्रेल लिपि में पुस्तकें प्रकाशित करता है। यह हर दूसरे वर्ष नई दिल्ली में ‘विश्व पुस्तक मेले’ का आयोजन करता है, जो एशिया और अफ्रीका का सबसे बड़ा पुस्तक मेला है। यह प्रतिवर्ष 14 से 20 नवम्बर तक ‘राष्ट्रीय पुस्तक सप्ताह’ भी मनाता है। पुस्तक पर दोहे-डॉ एन के सेठी

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