कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

शब्दो पर दोहे

हिंदी कविता

शब्दो पर दोहे १सागर मंथन जब हुआ, चौदह निकले रत्न।*अन्वेषण* नित कर रहे, सतत समस्त प्रयत्न।।२*सम्प्रेषण* होता रहे, भव भाषा भू ज्ञान।विश्व राष्ट्र परिकल्पना, हो साकार सुजान।।३अपनी रही विशेषता, सब जन के परि त्राण।बना *विशेषण* हिन्द यह, सागर हिन्द प्रमाण।४*अन्वेषण* करिए सतत, *सम्प्रेषण* कर ज्ञान।बने *विशेषण* मानवी, विश्व राज्य सम्मान।।५खिलते फूल बसंत जब, करते *अलि* […]

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मुस्कान पर कविता

हिंदी कविता

मुस्कान पर कविता मुझे बाजार मेंएक आदमी मिलाजिसके चेहरे परन था कोई गिलाजो लगतारमुस्करा रहा थाबङा ही खुशनजर आ रहा थामैंने उससे पूछा किकमाल है आजजिसको भी देखोमुंह लटकाए फिरता हैतनावग्रस्त-सा दिखता हैआपकी मुस्कान काक्या राज हैमुस्करा रहे होकुछ तो खास हैउन्होंने कहामुझपे भीमहंगाई की मार हैमुझपे भीगम सवार हैयहाँ दुखदाईभ्रष्टाचार हैऐसे मेंखुश रहना कैसामुस्कराता

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बसन्त आयो रे पर कविता

प्रकृति और पर्यावरण

बसन्त आयो रे पर कविता ऋतु बसन्त शुभ दिन आयो रे,सबके मन को भायो रे।पात-पात हरियाली सुन्दर,मधु बन भीतर छायो रे।। नीला अम्बर खूब सितारेसबके मन को भाते हैं।रक्त पलास खिले धरती पर,तन में अगन लगाते हैं।रंग-बिरंगे उपवन सुन्दर,प्रकृति खूब हर्षायो रे।ऋतु बसन्त खूब दिन आयो रे,……….। आम्र बौर अमराई खिलकर,पिय सन्देशा लाती है।कामुकता का

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कमजोरो पर कविता

हिंदी कविता

कमजोरो पर कविता कमजोर पर सभी हिमत दिखाते हैंलोग पत्थर से क्यों नही टकराते हैएक पीछे एक चलते हैंक्यों नही कुछ अलग कर दिखाते हैकुछ बढ़िया कर जाते हैंमहान बनने के लक्षण सभी में नही पते हैक्यों लोग;कमजोर पर हिमत दिखाते हैं साल निकल गएकि ताक नहीआज सभी सेवकऔर सेवा करना चाहते हैपता नही क्या

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शह-मात पर कविता-विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

शह-मात पर कविता जाने क्योंशह-मात खाते-खातेशह-मात देते-देतेकर लेते हैं लोगजीवन पूरामुझे लगासब के सबहोते हैं पैदाशह-मात के लिएनहीं हैकुछ भी अछूताशह-मात सेलगता हैशह-मात ही हैपरमो-धर्मशह-मात हैकण-कण में व्याप्तशह-मात ही हैअजर-अमर

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अब नहीं रुकूंगी पर कविता

हिंदी कविता

अब नहीं रुकूंगी पर कविता अब नहीं रुकूंगी,नित आगे बढूंगीमैंने खोल दिए हैं ,पावों की अनचाहे बेड़ियां।जो मुझसे टकराए ,मैं धूल चटाऊंगीहाथों में डालूंगी ,उसके अब हथकड़ियां।।(१)अब धुल नहीं मैं ,ना चरणों की दासी।अब तो शूल बनूंगीअन्याय से डरूँगी नहीं जरा सी।क्रांति की ज्वाला हूँ मैं,समझ ना रंगीनी फुलझड़ियाँ ।।मैंने खोल दिए हैं ,पावों की

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आजाद देश की दशा पर कविता

हिंदी कविता

आजाद देश की दशा पर कविता भाई भाई में देखो कितनी लड़ाई हैहर चौराहे पर बैठा देखो कसाई हैपर्दे में आज भी रहती है बहू बेटियांकहते हैं लोग हमारा देश आजाद है। बेटियों के घर पर बेटा घर जमाई हैंन जाने लोगों ने कैसी रीत बनाई हैरस्मो रिवाज में बांधकर बेटियों कोकहते है लोग हमारा

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mera bharat mahan

स्वदेशी पर कविता

हिंदी कविता

स्वदेशी पर कविता इंग्लिस्तानी छोड़ सभ्यता,अपनाओ देशीहिंदुस्तानी रहन-सहन हो,छोड़ो परदेशी। वही खून फिर से दौड़े जो,भगतसिंह में था,नहीं देश से बढ़कर दूजा, भाव हृदय में था,प्रबल भावना देशभक्ति की,नेताजी जैसी,इंग्लिस्तानी छोड़ सभ्यता,अपनाओ देशीहिंदुस्तानी रहन-सहन हो,छोड़ो परदेशी। वही रूप सौंदर्य वही हो,सोच वही जागे,प्राणों से प्यारी भारत की,धरती ही लागे,रानी लक्ष्मी रानी दुर्गा सुंदर थी कैसी,इंग्लिस्तानी

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देशप्रेम पर कविता-कन्हैया साहू अमित

हिंदी कविता

देशप्रेम पर कविता देशप्रेम रग-रग बहे, भारत की जयकार कर। रहो जहाँ में भी कहीं, देशभक्ति व्यवहार कर। मातृभूमि मिट्टी नहीं, जन्मभूमि गृहग्राम यह।स्वर्ग लोक से भी बड़ा, परम पुनित निजधाम यह।जन्म लिया सौभाग्य से, अंतिम तन संस्कार कर।-1रहो जहाँ में भी कहीं, देशभक्ति व्यवहार कर। वीरभूमि पैदा हुआ, निर्भयता पहचान है। धरती निजहित त्याग

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प्रेम उत्तम मार्ग है पर कविता

हिंदी कविता

प्रेम उत्तम मार्ग है पर कविता अन्नय प्रेम है तुझसे रीतेरे स्वर लहरी की मधुर तान।तुम प्रेम की अविरल धारा होमुख पे तेरी है मिठी मुस्कान ।मेरे मन में बसी है तेरी छवितुम्हें देख के मेरा होय विहान।मैं व्यथित, विकल हूँ तेरे लिएहे प्रिय तुम्हीं हो मेरे प्राण ।शीतल सुरभित मंद पवन भीदेख-देख तुम्हें शरमाई

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बिहार बरबीघा (पुनेसरा) के कवि बाँके बिहारी बरबीगहीया द्वारा रचित कविता तुम और चाँद जो निश्छल प्रेम पर कविता को को दर्शाता है ।।

हिंदी कविता

निश्छल प्रेम पर कविता चाँद तू आजा फिर से पास मेरेबिन तेरे जिन्दगी अधूरी है ।खोकर तुम्हें आज मैंने जाना हैमेरे लिए तू कितनी जरूरी है ।। रूठी हो अगर तो मैं मनाता हूँमाफ कर अब मैं कसम खाता हूँगलती ना होगी अब से वादा हैतेरे कदमों में सर झुकाता हूँ । इश्क है तुमसे

बिहार बरबीघा (पुनेसरा) के कवि बाँके बिहारी बरबीगहीया द्वारा रचित कविता तुम और चाँद जो निश्छल प्रेम पर कविता को को दर्शाता है ।। Read More »

राधा और मीरा पर लेख

हिंदी कविता

रक्षा बन्धन एक महत्वपूर्ण पर्व है। श्रावण पूर्णिमा के दिन बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधती हैं। यह ‘रक्षासूत्र’ मात्र धागे का एक टुकड़ा नहीं होता है, बल्कि इसकी महिमा अपरम्पार होती है। कहा जाता है कि एक बार युधिष्ठिर ने सांसारिक संकटों से मुक्ति के लिये भगवान कृष्ण से उपाय पूछा तो कृष्ण

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