कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

प्रेम पर कविता – विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

प्रेम पर कविता -विनोद सिल्ला गहरा सागर प्रेम का, लाओ गोते खूब।तैरोगे तो भी सही, निश्चित जाना डूब।। भीनी खुशबू प्रेम की, महकाए संसार। पैर जमीं पर कब लगें, करे प्रेम लाचार।। पावन धारा प्रेम की, बहे हृदय के बीच।मन निर्मल करके नहा,व्यर्थ करोमत कीच।। साज बजे जब प्रीत का, झंकृत मन के तार।रोम-रोम में […]

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लक्ष्य पर ग़ज़ल – सुशी सक्सेना

हिंदी कविता

कांटों भरा हो या फूलों भरा, जारी ये सफ़र रखना,कदम जमीं पर हो, मगर आसमां पर नजर रखना। मुश्किलों भरीं हैं, ये राहें जिंदगी की, ऐ साहिबचैन न मिले तो उलझनों में ही हंसी बसर रखना। खोने न देना होश, कामयाबियां जब कदम चूमेगमों में दिल के टुकड़ों को अपने सभांल कर रखना यूं तो

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लगी आग सरहद पर,कैसे राग बसंती गाऊँ मैं

हिंदी कविता

सीमा रक्षा करते,उनको झुककर शीश नवाऊँ। लगी आग सरहद पर,कैसे राग बसंती गाऊँ। जान हथेली पर रख, सैनिक सीमा पर डटे हुए। मातृ भूमि रक्षा में,वो सब अपनों से दूर हुए।। मेरी भी इच्छा है,दुश्मन से मैं भी लड़ जाऊँ। लगी आग सरहद पर,कैसे राग बसंती गाऊँ।। फड़के आज भुजाए, नहीं बसंती रंग सुहाता। मां

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माटी की शान वीर नारायण सिंह पर

देशभक्ति, हिंदी कविता

भारत को आजादी पाना इतना नहीं था आसान ।वीरों ने संघर्ष किया और किया अपना बलिदान ।अग्रगण्य हैं उनमें सदा छत्तीसगढ़ के वीर महान।शहीद वीर नारायण सिंह बने इस माटी की शान। भुखमरी का शिकार हो रहे थे ,हमारे प्रांतवासी।कोई नहीं देख सकता ऐसा दृश्य जो हो साहसी।क्रूर माखन का लूटा गोदाम, संकोच ना जरा

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संत गाडगे पर कविता

हिंदी कविता

संत गाडगे को जाना है==================दीन दुखियों को गले लगाकर,जिसने अपना माना है ।मानव सेवा बन मसीहा ,संत गाडगे को जाना है । फूले बुद्ध कबीर जी का,ज्ञान सदा जो पढ़ता है ।निर्गुण भक्ति की धारा में ,नित आगे ही बढ़ता है ।अपने त्याग तपस्या के बल,संत गाडगे जी कनक बने।मानवता का धर्म निभाकर,हम बहुजनों के

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बाबा गाडगे का जीवन – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

बाबा गाडगे का जीवन धन दौलत चाहे रुपया पैसाभौतिक संपदा हो भरपूर।जनसेवा में लगा दो मनुवादान करो, बनके सच्चे सूर। देखो,बाबा गाडगे का जीवनभीख मांगा पर किया समर्पणदिया सर्वस्व लोक सेवा हेतुजो भी रहा अपना अर्जन ।। नहीं बनवाई अपनी कुटियाबीता दिया जीवन तरु तल।एक बर्तन से ही खाना पीनाउसी से  करते भजन कीर्तन अनपढ़

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सादा जीवन पर कविता -मनीभाई नवरत्न

प्रकृति और पर्यावरण

सादा जीवन पर कविता –मनीभाई नवरत्न एक ओर रंगशालादूसरी ओर रंग सादा।कोई टक्कर नहीं जिनके बीचकौन सुरमा है ज्यादा?वैसे ख्याति विविध रंगों की हैहरा लाल पीला नीलाये ना होते तोकहने वाले राय मेंदुनिया बेरंग होती ।पर जरा सोचो तोरंगों की उत्पत्ति कहां से हुई ?प्रकृति की छटा बिखेरती इंद्रधनुषकैसे प्रकट हुआ ?सूर्य की श्वेत रश्मि

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मन की व्यथा – आशीष कुमार

हिंदी कविता

मन की व्यथा इस निर्मोही दुनिया मेंकूट-कूट कर भरा कपटकहाँ फरियाद लेकर जाऊँ मैंकिसके पास लिखाऊँ रपट जिसे भी देखो इस जहाँ मेंभगा देता है मुझे डपटशांति नहीं अब इस जीवन मेंकहाँ बुझाऊँ मन की लपट जो भी था मेरे पास मेंसबने लिया मुझसे झपटरिश्तों की जमा पूँजी में भीसबने लगाई मुझे चपत कमाई मेरे

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वागेश्वरी वंदना

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

वागेश्वरी वंदना माँ वीणावादिनी , मां बुद्धिदायिनी तव महिमा है अपरंपार कर माते तू लोकाद्धार तव ममता से जग आलोकित ज्योतिर्मय जग जगमग शोभित गाता नवगीत संसार………! वागेश्वरी , माँ ज्ञानदायिनि , सबको देती बुद्धि, ज्ञान , तव दृग जग का कल्पना द्वार……! दृष्टि से सृष्टि आलोकित तेज से जगजीवन है शोभित तव कृपावश ज्ञान

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संविधान का मान तिरंगा है

हिंदी कविता

संविधान का मान तिरंगा है तीन रंग से बना हुआ ये संविधान का मान तिरंगा है। पूरे जग में सबसे न्यारा आन बान अरु शान तिरंगा है।। जाति पांति के भेद मिटाता ये हम सबकी करता रखवाली। तीन रंग इसके अंदर है लहराता ये तब बजती ताली।। लोकतंत्र का है प्रतीक ये न्याय दिलाता जान

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मन की व्यथा

हिंदी कविता

मन की व्यथा इस निर्मोही दुनिया में कूट-कूट कर भरा कपट कहाँ फरियाद लेकर जाऊँ मैं किसके पास लिखाऊँ रपट जिसे भी देखो इस जहाँ में भगा देता है मुझे डपट शांति नहीं अब इस जीवन में कहाँ बुझाऊँ मन की लपट जो भी था मेरे पास में सबने लिया मुझसे झपट रिश्तों की जमा

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सेनानी बन जाएं हम

हिंदी कविता

चलो गुलामी आज़ादी का, मिलकर खेल बनाएं हम। तुम व्यापारी अंग्रेज बनो, और सेनानी बन जाएं हम।। तुम हम पर कर लगाओ, तो तड़प तड़प जाएं हम। भूख प्यास बर्दाश्त ना हो, और सेनानी बन जाएं हम।। सत्ताधारी भ्रष्टाचारियों के, जंजाल में फंस जाएं हम। नासूर लाइलाज बनो तुम, और सेनानी बन जाएं हम।। बेरोज़गारी

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