कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

बसंत पंचमी पर गीत – सुशी सक्सेना

हिंदी कविता

मेरे मन का बसंत बसंत ऋतु का, यहां हर कोई दिवाना है।क्या करें कि ये मौसम ही बड़ा सुहाना है।हर जुबां पर होती है, बसंत ऋतु की कहानी।सुबह भी खिली खिली, शाम भी लगती दिवानी। चिड़ियों ने चहक कर, सबको बता दिया।बसंत ऋतु के आगमन का पता सुना दिया।पतझड़ बीत गया, बन गया बसंती बादल।पीली […]

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देश भक्ति गीत – सुशी सक्सेना

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

इश्क ऐ वतन इश्क ओ उल्फत कुछ हमें भी है इस वतन से।कुछ कर गुजेरेंगे, इक रोज़ हम भी तन मन से। गुलशन अपने वतन का जार जार न होने देंगे।इसकी किसी भी कली को बेजार न होने देंगे। अमर शहीदों की अमानत को संभाल कर रखेंगे।प्यारे वतन को हर मुश्किल से निकाल कर रखेंगे।

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एक पड़ोसन पीछे लागी – उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

एक पड़ोसन पीछे लागी आज लला की महतारी कौ, अपुने मन की बात बतइहौं एक पड़ोसन पीछे लागी, बाकौ अपुने घरि लै अइहौं। बाके मारे पियन लगो मैं, नाय पियौं तौ रहो न जाबै चैन मिलैगो जबहिं हमैं तौ, सौतन जब सबहई कौ भाबै बाके एक लली है ताको, बाप हमहिं कौ आज बताबैकेतो अच्छो

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सुभाष चंद्र बोस जयंती – उपमेंद्र सक्सेना

नारी जीवन और संवेदना

सुभाष चंद्र बोस जयंती – उपमेंद्र सक्सेना थे सुभाष जी मन के सच्चे, सबने उनको इतना माना।नेता जी के रूप में उन्हें, सारी दुनिया ने पहचाना। सन् अट्ठारह सौ सतानवे, में तेईस जनवरी आयीतब चौबीस परगने के कौदिलिया ने पहचान बनायीथा सुभाष ने जन्म लिया, माताजी प्रभावती कहलायींपिता जानकी नाथ बोस ने, थीं ढेरों बधाइयाँ

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तुकांत क्या है ?

हिंदी कविता

तुकान्त क्या है ?     काव्य पंक्तियों के अंतिम भाग में पायी जाने वाली वर्णों की समानता को तुकान्त कहते हैं।      कविता के शिल्प में तुकान्त का विशेष महत्व है, इसलिए काव्य-साधना के लिए तुकान्त-विधान समझना आवश्यक है। आइए हम तुकान्त को समझने का प्रयास करें ।       इसे समझने

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गुरु की मार

हिंदी कविता

5 अक्टूबर 1994 को यूनेस्को ने घोषणा की थी कि हमारे जीवन में शिक्षकों के योगदान का जश्न मनाने और सम्मान करने के लिए इस दिन को विश्व शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाएगा। गुरु पूर्णिमा – महर्षि वेद व्यासजी का जन्म आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही हुआ था, इसलिए भारत के सब लोग

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सरस्वती वंदना

हिंदी कविता

सरस्वती वंदना हँसवाहिनी माँ की जय जय वीणावादिनी जय हो शुभ्रज्योत्स्ना भरो हृदयमें अन्धकार सब क्षय हो पद्मासना श्वेत वस्त्रा माँ तेरी जय जय जय हो 2 पुलकित ज्ञान ज्योति में मेरी सद्बुद्धि की लय हो ज्ञानदायिनी तब प्रकाश में मेरा तिमिर विलय हो कमल आसनी वागीश्वरी माँ तेरी जय जय जय हो 3 तेरे

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ईश्वर पर कविता

हिंदी कविता

ईश्वर (विधाता छंद ) पहाड़ों को, घटाओं को, हवाओं को बनाया है गगन के थाल को जिसने सितारों से सजाया है धरा की गोद में कानन सघन उपवन बसाया है मेरे ईश्वर की महिमा है! मेरे ईश्वर की माया है 2 जहाँ सूरज को शिशु हनुमान ने मुंह मे दबाया है दिवाकर ने जहाँ करके

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jai durga maa

जय माँ दुर्गे तुम्हें प्रणाम /रमेश

हिंदी कविता

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं। शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। जय माँ दुर्गे तुम्हें प्रणाम अष्ट सिद्धि नौ निधियों वालीजीवन में जो लाये

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shri Krishna

श्रीकृष्ण जय कृष्ण हरे मुरारी

हिंदी कविता

श्रीकृष्ण जय कृष्ण हरे मुरारी जय गोपी बल्लभ कुञ्ज बिहारी 1 नन्द यशोदा की छवि प्यारीगोकुल धाम की महिमा न्यारीनाम तुम्हारा कृष्ण मुरारीमाधव गिरिधारी त्रिपुरारी श्रीकृष्ण जय कृष्ण हरे मुरारीजय गोपी बल्लभ कुञ्ज बिहारी 2 कारागार का खोला तालायमुना की लहरों को नवायातृणावर्त वत्सासुर तारादैत्य बकासुर को संहारा श्रीकृष्ण जय कृष्ण हरे मुरारीजय गोपी बल्लभ

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Jai Sri Ram kavitabahar

अधर जपे यह आठो याम श्री राम / रमेश कवल

हिंदी कविता

राम/श्रीराम/श्रीरामचन्द्र, रामायण के अनुसार,रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र, सीता के पति व लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के भ्राता थे। हनुमान उनके परम भक्त है। लंका के राजा रावण का वध उन्होंने ही किया था। उनकी प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता तक का त्याग किया। अधर जपे यह आठो याम श्री राम / रमेश कवल 1 दुःख में पास न आने वालेसुख

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जय शिव शम्भू कृपा करो

हिंदी कविता

जय शिव शम्भू कृपा करो जय शिव शम्भू कृपा करो हम भक्तन के क्लेश हरो जय शिव जय शिव ॐ नम: ॐ नम: जय शिव जय शिव 1 पर्वत पर हरियाली तुम से सागर में खुशहाली तुम से गंगा हैं मतवाली तुम से संतन के संताप हरो हे शिव शम्भू कृपा करो 2 कृपा सिंधु

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