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परिवार या मकान- सीमा गुप्ता (लेखिका)

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परिवार या मकान- सीमा गुप्ता (लेखिका)


इंसान थका हारा काम कर लौटता है,
सारे सुख, खुशी,प्यार, हंसी मिलती है,
उसी को परिवार बोला जाता है।,
जहां नहीं मिले ये सब सुकून वो घर..
पत्थर,ईंट का ही मकान बन रह जाता है,

परिवार में खुशी की शहनाई गूंजती है,
प्रेम,प्यार ठुमक- ठुमक डोलता है,
सुख-दुख आपस में बांटा जाता है।

बिखरे जहां साथ- संवाद की रोशनी,
चमके समझ, सहिष्णुता का आलोक,
पोषित हो अनुभव परम्पराओं की ज्योति,
परिवार है जहां इन की अनुभूति होती।

मकान में अलगाव पाया जाता है,
रह करभी वहां नहीं रहा जाता है,
मन मसोस कर जीवन गुजारा जाता है,
पता नहीं कि एक दूसरे से क्या नाता है?

घर को मकान नहीं परिवार बनाएं,
खुशहाली सुख समृद्धि खान बनाएं।


– सीमा गुप्ता (लेखिका)
महल चौक (अलवर)

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2 Comments
  1. Bhavesh gupta says

    👏👏

  2. Amita says

    घर को मकान नहीं परिवार बनाएं,
    खुशहाली सुख समृद्धि की खान बनाएं,
    बहुत सुंदर, विश्व परिवार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं