कविता 14 प्रेम की परिभाषा- मनीभाई नवरत्न

कविता 14
प्रेम की परिभाषा
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प्रेम वो धुरी है
जिसके बिना
जिंदगी अधुरी है।
प्रेम जरूरी है
छलछद्म,ईर्ष्या
बहुत ही बुरी है।
प्रेम संसार है
सुख शांति का
एक आधार है।
प्रेम  शक्ति है
ईश्वरीय दर्शन
श्रद्धा भक्ति है।
प्रेम अनुराग है
मात्र चाह नहीं
सच्चा त्याग है।
प्रेम परीक्षा है
मानव बनने की
एक दीक्षा है।
प्रेम प्रतीज्ञा है
संकट क्षण में
सच्ची प्रज्ञा है।
प्रेम  सूक्ति है
मोह माया से
मोक्ष मुक्ति है।
प्रेम परमात्मा है
प्रतिशोध से दूर
त्रुटि पर क्षमा है।
प्रेम वो डोर है
दोनों ही सिरा
जन्नत ओर है।
प्रेम एक रंग है
ख़ुदी खोने की
सरल  ढंग  है।
प्रेम क्या है?
दिल की तू सुन
वहां सब बयां है।
मनीभाई”नवरत्न”

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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