KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

प्यार से हुआ सृष्टि संचार

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प्यार से हुआ सृष्टि संचार

प्यार से हुआ सृष्टि संचार ।
प्यार का अद्भुत है संसार।
प्यार का है चहुँदिशि विस्तार,
प्यार पाता रहता प्रतिकार ।
रविरश्मि का कोमल संचार,
अनिल का किसलय संग विहार ।


सुमन पर भौंरे का गुंजार ,
फुदकती तितली पंख पसार।
अचल वन तरुओं का निर्वाह ,
सरित सर निर्झर वेग प्रवाह। 
निर्मित पंचतत्व  संग मेल,
रचा विधि ने यह सारा खेल।


प्यार है रिश्तों का आधार,
प्यार ममता वात्सल्य दुलार।
प्यार है सब रिश्तों की डोर,
प्यार का पकड़े रहते छोर।
मनुज मन में जगता जब प्यार,
बसाता एक नया संसार।

तोड़ देता जगती की रीत,
निभाता बड़े जतन से प्रीत।
प्यार में बसा अमिट विश्वास,
निभाता उसको जब तक सांस।
स्वप्न का स्वर्णिम सा संसार,
सींचता अमित स्नेह जलधार।


प्यार कान्हा का बंशी गान,
प्यार राधिका नृत्य की शान।
समाया मीरा का अनुराग,
पलट करके तुलसी का राग।

पुष्पा शर्मा “कुसुम”

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