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राह नीर की छोड़ – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

इस रचना में कवि ने जीवन में आगे बढ़ने को सभी को प्रेरित किया है |
राह नीर की छोड़ – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

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राह नीर की छोड़ – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “



राह नीर की छोड़ बनो तुम वीर ।
राह कायरता की छोड़ बनो तुम धीर।।

राह निज की तुम छोड़ बनो सर्वस्व।
राह आलस की छोड़ बनो तुम कर्मठ।।

राह कटुता की छोड़ बनो तुम कृतघ्न।
राह पशुता की छोड़ बनो तुम मानव।।

राह शत्रुता की छोड़ बनो तुम मित्र।
राह अहम की छोड़ बनो तुम सज्जन।।

राह उदासीनता की छोड़ अपनाओ तुम कर्म।
राह चंचलता की छोड़ धरो गांभीर्य।।

राह शठता की छोड़ अपनाओ सज्जनता।
राह घृणा की छोड़ अपनाओ वात्सल्य।।

राह मरण की छोड़ धरो अमरत्व।
राह अस्त की भूल , उदय हो तेरा।।

राह नरत्व की छोड़ अपनाओ देवत्व।
राह उदासी की छोड़ अपनाओ इंसानियत।।

राह नीर की छोड़ बनो तुम वीर।
राह कायरता की छोड़ बनो तुम धीर।।

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