हिन्दी कविता: राजनीति और भ्रष्टाचार -मनीभाई नवरत्न

राजनीति और भ्रष्टाचार
पहिये हैं एक गाड़ी के ।
सेवा है राजनीति देशभक्तों का
खेल है ये अनाड़ी के ।।
सफेद लिबास में मत जाना,
नजरें धोखा खा जायेगी ।
भ्रष्टता की कालिमा तुझे
पीठ पीछे नजर आयेंगी ।
अब नहीं होते राम विक्रमादित्य
चस्का है सबको बंगला गाड़ी के ।।
जहां लड़ा जाये सत्ता पाने को,
वहाँ समाज सेवा कोसों दूर है ।
एक दूजे की टांग खींचे जिसे पाने को
उस कुर्सी में कुछ बात जरूर है।
खींचातानी, चुगली निन्दा
जायज सब पैंतरे, इस खेल में  खिलाड़ी के।।
अनपढ़ अपराधी को समाज दूतकारें ।
पर राजनीति इन्हें सहर्ष स्वीकारें ।
लोकतंत्र की पांव है राजनीति
भ्रष्ट रंग ना चढ़ाओ।
नीतियाँ होती आमजन की ,
जिसको अंतिम पंक्ति ले जाओ।
राजनीति पुष्प है,
भ्रष्टाचार खरपतवार है  बाड़ी के।।
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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