सबको चांद का दीदार चाहिए

सबको चांद का दीदार चाहिए…
मुझे तो मेरा चांद पास मिला है।
ये वो  नहीं जो आसमान का है…
ये नक्षत्र तो मेरे दिल में खिला है।
तू चांद देख जानम..और अपना व्रत तोड़ ले।
मैं ना छोड़ूँ  ये व्रत , चाहे सारा जग छोड़ दे।
तेरे साथ रहना माहिया
बस यही कहना माहिया
तेरे साथ रहना..।
तेरे संग चलना माहिया
बस यही कहना माहिया
तेरे साथ रहना..।
इस दुपट्टे की लाल में प्यार की गहराई है।
माथे के सिन्दूरी में  यादों की शहनाई है।
गले में ये मंगलसूत्र रिश्तों की पूजा है।
तुमसे बढ़के मेरा यहाँ कोई ना दूजा है ।
मैं ना बिकूंगा तुझे चोट देने के लिए
कोई मुझे चाहे लाख करोड़ दें।
मैं ना छोड़ूँ ये व्रत , चाहे सारा जग छोड़ दे।
तेरे साथ रहना माहिया
बस यही कहना माहिया
तेरे साथ रहना..।
तेरे संग चलना माहिया
बस यही कहना माहिया
तेरे साथ रहना..।
शाम की इन हवाओं में रंगीनी छाई है।
जैसे समां ने खुशी से मेंहदी रचाई  है।
हर पति खुशकिस्मत है चेहरे में साज है।
आज अपने पत्नी पे उसे गर्व और नाज़ है।
करवाचौथ का त्यौहार हम सबके लिये
रिश्तों में खुशहाली मोड़ दें।
मैं ना छोड़ूँ  ये व्रत , चाहे सारा जग छोड़ दे।
तेरे साथ रहना माहिया
बस यही कहना माहिया
तेरे साथ रहना..।
तेरे संग चलना माहिया
बस यही कहना माहिया
तेरे साथ रहना..।
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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