किसे पता है कल क्या होगा – बाबूराम सिंह

किसे पता है कल क्या होगा



निज स्वार्थ में बल क्या होगा?
कभी किसीका भल क्या होगा?
वर्तमान का सदुपयोग कर-
आज नहीं तो कल क्या होगा?

एकता बिन मनोबल क्या होगा?
साहस बिन सम्बल क्या होगा?
पीर पराई बिन दुनीयां में-
सोचो अश्रु जल क्या होगा?

प्यार बिना पल-पल क्या होगा?
शान्ति सुख अचल क्या होगा?
पल में परलय- लय सब होगा-
तब तेरा हस्ती बल क्या होगा?

बिन जगे हलचल क्या होगा?
जन्म-जीवनअव्वल क्या होगा?
एक , नेक हो आगे बढना-
नहीं तो दृढ़ अटल क्या होगा?

नेक बिना उज्वल क्या होगा?
मोह,माया अस मल क्या होगा?
ईश भक्ति सुचिता में रहकर-
कोई कभी विकल क्या होगा?

करूणा बिना कोमल क्या होगा?
बिन सदभाव सरल क्या होगा?
सत्य , अहिंसा , प्रेम ,दया बिन-
नर जीवन भूतल क्या होगा?

सुमनों बिन परिमल क्या होगा?
बिना प्रेमाश्रु तरल क्या होगा?
शर्म , सभ्यता ,अनुसासन बिन-
कुछ भी कभी अमल क्या होगा?

प्रश्न बहुत पर हल क्या होगा?
छल-कपटों का फल क्या होगा?
आज धरा पर जो बैठें हैं-
किसे पता है कल क्या होगा?

पाप में पावन पल क्या होगा?
सत्य में झूठ गरल क्या होगा?
प्रेम , श्रध्दा , विश्वास बिना-
कवि बाबूराम विमल क्या होगा?

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बाबूराम सिंह कवि,गोपालगंज,बिहार
मोबाइल नम्बर-9572105033
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