KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

सेदोका की सुगन्ध-पद्ममुख पंडा स्वार्थी

531

सेदोका की सुगन्ध-पद्ममुख पंडा स्वार्थी

प्रचण्ड गर्मी
सहता गिरिराज
पहन हिमताज
रक्षक वह
है हमारे देश का
हमको तो है नाज़

वृक्षारोपण
एक अभिवादन
जो बना देता  वन
पर्यावरण 
सुरक्षित रखने
खुश हो जाता मन

नाप सकते
मन की गहराई
काश संभव होता
समुद्र में भी
हो फसल उगाई
ग़रीबी की विदाई
 

सत्यवादी जो
परेशान रहता
अग्नि परीक्षा देता
पूरी दुनिया
उसे हंसी उड़ाती
वो चूं नहीं करता

अंधा आदमी
मन्दिर चला जाता
खुद को समझाता
उसे देखने
जो दिखता ही नहीं
आंखों के होते हुए

उसके घर
देर भी है सर्वदा
अंधेर भी है सदा
न्याय से परे
मिलता परिणाम
खास हो या कि आम

जो करते हैं
अथक परिश्रम
क्या थकते नहीं हैं?
सच तो यह
कि बिना थके कभी
काम ही नहीं होता!!

अनवरत
जीवन  रथ चले
सुबह सांझ ढले
मज़ाक नहीं
कि परिवार पले
बिना आह निकले

मेरी कुटिया
मुझे आराम देती
मेरी खबर लेती
बिजली नहीं
तो भी प्रकाश देती
ठंडक बरसाती

सत्यवादी जो
परेशान रहता
अग्नि परीक्षा देता
पूरी दुनिया
उसे हंसी उड़ाती
वो चूं नहीं करता

अंधा आदमी
मन्दिर चला जाता
खुद को समझाता
उसे देखने
जो दिखता ही नहीं
आंखों के होते हुए

उसके घर
देर भी है सर्वदा
अंधेर भी है सदा
न्याय से परे
मिलता परिणाम
खास हो या कि आम

जो करते हैं
अथक परिश्रम
क्या थकते नहीं हैं?
सच तो यह
कि बिना थके कभी
काम ही नहीं होता!!

अनवरत
जीवन  रथ चले
सुबह सांझ ढले
मज़ाक नहीं
कि परिवार पले
बिना आह निकले

मेरी कुटिया
मुझे आराम देती
मेरी खबर लेती
बिजली नहीं
तो भी प्रकाश देती
ठंडक बरसाती

पद्म मुख पंडा स्वार्थी

FOLLOW – kavitabahar.com


कविता बहार में प्रकाशित हुए सभी चयनित कविता के नोटिफिकेशन के लिए kavitabahar.com पर विजिट करें और हमारे सोशल मिडिया (@ Telegram @ WhatsAppFacebook @ Twitter @ Youtube @ Instagram) को जॉइन करें। त्वरित अपडेट के लिए हमें सब्सक्राइब करें।


You might also like

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.