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सरसी/कबीर/सुमंदर छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें


सरसी/कबीर/सुमंदर छंद [सम मात्रिक] विधान – 27 मात्रा, 16,11 पर यति, चरणान्त में 21 लगा अनिवार्य l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l

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विशेष : चौपाई का कोई एक चरण और दोहा का सम चरण मिलाने से सरसी का एक चरण बन जाता है l

उदाहरण :
पहले लय से गान हुआ फिर, बना गान ही छंद,
गति-यति-लय में छंद प्रवाहित, देता उर आनंद।
जिसके उर लय-ताल बसी हो, गाये भर-भर तान,
उसको कोई क्या समझाये, पिंगल छंद विधान।

– ओम नीरव

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