KAVITA BAHAR
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सुनो एक काम करते हैं

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सुनो एक काम करते हैं

सुनो एक काम करते हैं दोनों भाग जाते हैं
चलेंगे उस जगह पे हम जहां सब मुस्कुराते हैं
बहारों का हंसी मौसम जहाँ हर रोज़ रहता हो
पपीहे पीहू पीहू के जहाँ पे गीत गाते हैं

दूर तक फैला हो अम्बर क्षितिज सा इक नज़ारा हो
बीच खेतों के सुंदर सा वहीं इक घर हमारा हो
जिसके अँगने में सभी पँछी डाल पे चहचहाते हैं
सुनो एक काम ………….

नहीं है ये कोई सौदा,नहीं है कोई लाचारी
सच्चा प्यार दिल में है तो करलो तुम ये तैयारी
जानेमन न घबराओ हम तुमपे जान लुटाते हैं
सुनो एक काम…..

ज़रा दो हाथ हाथों में तुमसे वादा इक करना है
ये ‘चाहत’ दिललगी सब कुछ तुम्हारे नाम करना है
चलो न प्रेम की प्यारी सी हम बगिया सजाते हैं
सुनो एक काम …….

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नेहा चाचरा बहल ‘चाहत’
झाँसी

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