KAVITA BAHAR
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मानव स्वभाव पर आधारित

हो गया खामोश चिड़ियों के बिना अब भोर है – रेखराम साहू…

आत्म विज्ञापन अधिक तो,लेखनी कमजोर है,गीत गूँगे हो रहे हैं,बक रहा बस शोर है ।।टिमटिमाते बुझ रहे हैं, नेह के दीपक यहाँ।और नफरत का अँधेरा, छा रहा घनघोर

माधुरी मंजरी में सपना पर आधारित कविता – माधुरी डड़सेना…

माधुरी मंजरी 05/06/2020 आँखों में सपने लिए , बढ़ती मैं हर रोज ।मंजिल मुझे पुकारती , करते मेरी खोज ।।साजन के सपने लिए ,मैं आई ससुराल ।रंग सभी भरने

माधुरी मंजरी में सपना पर आधारित कविता – माधुरी डड़सेना…

माधुरी मंजरी 05/06/2020 आँखों में सपने लिए , बढ़ती मैं हर रोज ।मंजिल मुझे पुकारती , करते मेरी खोज ।।साजन के सपने लिए ,मैं आई ससुराल ।रंग सभी भरने

स्वार्थी मत बन बावरे , काम करो निःस्वार्थ- रामनाथ साहू ननकी के…

स्वार्थी मत बन बावरे , काम करो निःस्वार्थ स्वार्थी मत बन बावरे , काम करो निःस्वार्थ ।शुद्ध भाव से कीजिए , जीवन में परमार्थ ।।जीवन में परमार्थ ,