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माँ पर रचना

मां पर आचार्य गोपाल जी के कविता (मातृ दिवस विशेष)

मातृ दिवस पर लिखी कविता माँ को समर्पित बाल कविता 1- वो दिन भी कितने अच्छे थे वो दिन भी कितने अच्छे थे । जब हम सब छोटे बच्चे थे । नित मां की

माँ

■■■माँ■■■ माँ तुमनें जन्म दिया, तुम जीवनदायिनी हो। प्यार मिला भी तुमसे, तुम ममतामयी हो।। तुमसे कोई और प्यारा नहीं माँ, तुम पूरी दुनिया हो। माँ…

माँ

विषय- माँ विधा--मनहरण घनाक्षरी ?????????? है माँ की शक्ति अपार माँ है सृष्टि का आधार माँ के जैसा कोई नही…

माँ

            माँ ●◆◆◆◆◆◆◆◆◆● ममता की मूरत होती है माँ, अपनी फर्ज निभाती है माँ। प्रीत सरस दिखाती है माँ, जीवन में खुशियाँ लाती है माँ।…

माँ की वह आँख

माँ की वह आँख - 04.05.2020 -----------------------------/ जब मैंने सुना कि माँ की एक आँख की रोशनी चली गई है सहसा जैसे रोशनी से मेरी यक़ीन ही उठ गई…

स्वरचित-बेटियाँ-

स्वरचित कविता- ---बेटियाँ---- बेटियों से ही घर में आती खुशियाँ अपार। बेटियों के बिन अधुरा घर…

माँ शारदे

स्वरचित रचना -------माँ शारदे------- सृजनता का आधार दे। मुझको ऐसा ज्ञान दे । अंधकार को दूर मिटा के। ज्ञान का प्रकाश दे । नमन् करूँ मै माँ…

नित्य करूँ मैं वंदना

, *दोहा छंद* , * नित्य करूँ मैं वंदना* नित्य करूँ मैं वंदना, गुरुवर को कर जोर। पाऊँ चरणों में जगह ,…