KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

थाम लो सँभालकर देश की मशाल को

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थाम लो सँभालकर देश की मशाल को


हिन्द के बहादुरो शूरवीर बालको!
थाम लो सँभाल कर देश की मशाल को!


अन्धकार का गरूर आन-बान तोड़ दो,
बालको, भविष्य के लिए मिसाल छोड़ दो,
दो नयी-नयी दिशा वर्तमान काल को।
थाम लो सँभाल कर देश की मशाल को!


देश माँगता कि खून से रंगा गुलाब दो,
तुम उठो सिपाहियो ! शत्रु को जवाब दो,
झूम-झूमकर मलो युद्ध के गुलाल को।
थाम लो सँभाल कर देश की मशाल को!


दूर तक जमीन पर शानदान जय लिखो,
तुम विशाल सिन्धु पर खून से विजय लिखो,
तोड़ दो पिशाच के तुम हरेक जाल को। .
थाम लो सँभाल कर देश की मशाल को!


रामावतार त्यागी

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