pola tihar chhattisgarh baila bhado amavashya

तीजा पोरा के दिन आगे

तीजा पोरा के दिन आगे

तीजा पोरा के दिन आगे चलो मइके दुआरी मा
उहाँ दाई डहर देखे अपन चढ़के अटारी मा ।

गुड़ी मा बैठ के रद्दा निहारत हे बिहनिया ले
लगे होही मया मारे सियनहा संग चारी मा ।

मया सुतरी ह लामे हे बिताए जम्मो घर डेरा
खुशी के दिन जहुँरिया के लेहे आही सवारी मा ।

भतीजा मन खेलत होही कहूँ डेहरी मा घरघुँधिया
बबा बर धोती ले जाहूँ लगे छिटही किनारी मा

डहर तरिया के अमरैया सुहावन होही कोयली ले
अगर नी जाहूँ तो संगी मता देही वो गारी मा ।

बड़े दीदी हा आगू ले पहुँचगे होही गुडिया घर
फूले होही तरोई हा अबड़ लटलट ले बारी मा ।

लिवाबो कई जिनिस हम तो पिया श्रृंगार के खातिर
पहिर के पूजा करे जाहूँ सबो सामान थारी मा ।

परब बेटी दुलौरिन के यही मइके के सपना हे
करे जोरा हे महतारी सुहागिन अउ कुँवारी मा ।

मनाबो शिव सुवारी ला अमर चूरी रहे सबके
जनम भर माँग में सेंदुर भरे सजना पियारी मा ।

माधुरी डड़सेना ” मुदिता “

तीजा पोरा के दिन आगे - कविता बहार - हिंदी कविता संग्रह

पोरा तिहार


छत्तीसगढ़ के परब आगे,
हिरदे मा ख़ुशी छा गे गा।
माटी के बइला ला भरले,
पोरा तिहार मना ले गा।
काठा भर पिसान सान ले,
ठेठरी खुरमी बना ले गा।
पोरा तिहार के परम्परा ला,
संगे- संग निभाले गा।
मोटरा बांध के ठेठरी खुरमी,
बहिनी घर अमराबे गा,
किसिम किसिम लम्हरी बोदकु,
ठेठरी सबला खवाबे गा।
सगा सोदर गांव समाज मा,
सुनता ल् बगराबे गा,
छत्तीसगढ़िया के तिहार म,
नाचबे अउ नचाबे गा।

महादीप जंघेल

Please follow and like us:

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page