KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

वो कांधा ना दिखा – आदित्य मिश्रा

एक मजबूत या कठोर व्यक्ति की व्यथा

0 136

वो कांधा ना दिखा – आदित्य मिश्रा

कांधा
HINDI KAVITA || हिंदी कविता

सब कहते हैं बहुत मजबूत हो
आंखे तुम्हारी बरसती ही नहीं।
मुस्कुराती हो हमेशा ही तुम
क्या गम से कभी गुजरी ही नहीं।

मैं खिलखिला जाती हूं
आंसू आंखों में छुपाती हूं।
कैसे कहूं उनसे अब मैं
रोना तो बहुत चाहा था मैंने
पर कोई मजबूत कांधा ना मिला।
पी ले मेरे आसुयों को कोई
ऐसा कोई शख्स ही ना दिखा।

तो बेवजह तुझे अपना दुख क्यों बताऊं
अपना जुलूस क्यों निकलवाऊं।
जब अपने गमों से खुद ही निपटना है
तो किस बात का रोना,धोना हैं ।

स्वरचित ✍️
साहित्यकार आदित्य मिश्रा
दक्षिणी दिल्ली,दिल्ली 9140628994

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.