April 2020

नास्तिक पर कविता

हिंदी कविता

नास्तिक पर कविता नास्तिक हीपैदा हुआ था मैंबाकी भीहोते हैं पैदा नास्तिक हीमानव मूल रूप मेंहोता है नास्तिक नाना प्रकार केप्रपंच करके उसेबनाया जाता है आस्तिककितना आसान है आस्तिक होनाबिना जाने मानना हैबिना तर्क किए मानना हैकिसी को नकारने के लिएचिंतन-मनन, तर्क-वितर्कअनुसंधान करना पड़ता है भले कितना ही दिखावा करेंआस्तिक होने काधर्म स्थलों के प्रभारीहोते […]

नास्तिक पर कविता Read More »

manibhai Navratna

सबसे बड़ा प्रैंकर: मनीभाई नवरत्न

मन और भावनाएँ,

सबसे बड़ा प्रैंकर : मनीभाई नवरत्न ये जो छूटती हैहंसी की झरने लबों से ।हो सकती है स्वास्थ्यवर्धक ,पर नहीं कह सकतेये फूटी होगी प्राकृतिक । पर इसमें दोष नहीं है ,अवतरण जो हुआ तेराऐसे भयानक कृत्रिम जग में। कभी-कभी सोचता हूँझूठा नहीं था प्लेटो।जो कहता था ये दुनिया मिथ्या है,उससे भी बनावटी यहाँ के

सबसे बड़ा प्रैंकर: मनीभाई नवरत्न Read More »

सर्वश्रेष्ठता पर कविता

प्रकृति और पर्यावरण

सर्वश्रेष्ठता पर कविता एकअदना जीवबेबस कर दियाअसहाय-त्रस्त-सहमा मानव,छुप बैठा अपनों से बचकर,जो हर कोण ढाल से,अपनों सा दिखते हैं.लेकिन पहचान नहीं बताते आसानी से. अब उनमें वहीं नहींबल्कि कोई और भी है.जो जान पर तूला है.हाय! ये मानव कुछ तो भूला है.नहीं तो ये प्रकृति ,हमारी भी है मां.सच!उसे पता हैसंतुलन कैसे है रखना?परिवर्तन उसका

सर्वश्रेष्ठता पर कविता Read More »

सर्चिंग पर लघु कथा

नारी जीवन और संवेदना

सर्चिंग पर लघु कथा अज्ञात मुखबिर से पुलिस को सुचना मिली की सलवाजुडूम कार्यकर्ताओं पर फायरिंग करने वाले मुख्य अभियुक्त महिला नक्सली लौमन कोतरापाल में छुपी हुई हैं।नक्सल ऑपरेशन प्रमुख एस एस पी दयाराम ने टीम गठित कर सर्चिंग दल को कोतरापाल जाने का आदेश दिया।दयाराम भी दल के साथ जंगल की ओर कूच कर

सर्चिंग पर लघु कथा Read More »

सच को सच जाने-राजकिशोर धिरही

हिंदी कविता

दोहे: -सच को सच जाने सच को सच जाने बिना,मुँह से कुछ मत बोल।सच आएगा सामने,बज जाएगा ढ़ोल।। सुनी सुनाई बात में,कुछ भी देते जोड़।रोके हम अफवाह को,जीवन के हर मोड़।। जात धर्म पे लड़ रहे,युग युग से इंसान।समझे जो खुद को बड़ा,इस जग में शैतान।। मानव मानव एक हैं,तन में हड्डी खून।मत करना तुम

सच को सच जाने-राजकिशोर धिरही Read More »

आम फल पर दोहे

हिंदी कविता

आम फल पर दोहे फल में राजा आम है,चाकू धर के काट।केसर देशी लंगड़ा,खाना इसको चाट।। कई किस्म है आम के,करता कफ को दूर।खास फायदा देह को,खाते इसको शूर।। पेट दर्द या गैस में,खाते हैं सब आम।फूल बीज फल छाल भी,करता औषधि काम।। पी लेना रस आम का,स्वस्थ रहेगा देह।खा लेना गुठली गिरी,दूर करे मधुमेह।।

आम फल पर दोहे Read More »

उपदेश पर कविता-मनोज बाथरे

हिंदी कविता

उपदेश पर कविता सोच रहें हैं किहम कुछ उपदेशदे सबकोपर कैसेक्या हमारा उपदेशकोई शिरोधार्य करेगाक्योंकि पर उपदेशदेने से पहलेहमें स्वयं उनकोअपनाना होगातब कहीं जाकरउपदेश कीसार्थकता सफल होगी।।

उपदेश पर कविता-मनोज बाथरे Read More »

Jai Sri Ram kavitabahar

श्रीराम स्तुति / लक्ष्मीकान्त शर्मा ‘रुद्रायुष’

हिंदी कविता

राम/श्रीराम/श्रीरामचन्द्र, रामायण के अनुसार,रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र, सीता के पति व लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के भ्राता थे। हनुमान उनके परम भक्त है। लंका के राजा रावण का वध उन्होंने ही किया था। उनकी प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता तक का त्याग किया। श्रीराम स्तुति / लक्ष्मीकान्त शर्मा ‘रुद्रायुष’ कारुण्य रूप जनार्दनम राजीवलोचन सुन्दरं।आजानबाहु किरीट मस्तक राम रूप पुरन्दरं जय

श्रीराम स्तुति / लक्ष्मीकान्त शर्मा ‘रुद्रायुष’ Read More »

आनंद पर कविता

हिंदी कविता

आनंद पर कविता मुझे है पूरा विश्वासनहीं है असली आनंदमठों-आश्रमों वअन्य धर्म-स्थलों में इन सब के प्रभारीलालायित हैंलोकसभा-राज्यसभाया फिर विधानसभा मेंजाने को मुझे है पूरा विश्वासअसली आनंदलोकसभा-राज्यसभाया फिर विधानसभामें ही है इसलिए हीयोगी, साध्वी वअन्य मठाधीश हैं टिकटार्थी संसद और विधानसभाओं मेंकीर्तन होने केप्रबल आसार हैं -विनोद सिल्ला©

आनंद पर कविता Read More »

लिखना पर कविता

हिंदी कविता

लिखना पर कविता क्या आप कविता लिखना चाहते हैं ?यदि हाँ तो दो विकल्प है आपके पास पहला विकल्प यह कि–उनके लिए कविताएं लिखनाएक बड़ी चुनौती लेना हैइसमें कठिन संघर्ष और खतरों के अंदेशे भी हैं बहुत सारे दूसरा विकल्प यह कि–उनके लिए कविता लिखनाअवसरों के दरवाज़े खोलना हैइसमें पुरस्कार और सम्मान की संभावनाएं भी

लिखना पर कविता Read More »

बेपरवाह लोग पर कविता

हिंदी कविता

बेपरवाह लोग पर कविता ये उन लोगों की बातें हैंजो लॉकडाउन,कर्फ़्यू, धारा-144जैसे बंदिशों से बिलकुल बेपरवाह हैं जो हजारों की तादात मेंकभी आनन्द विहार बस स्टेंड दिल्लीमेंयकायक जुट जाते हैंतो कभी बांद्रा रेल्वे स्टेशन मुम्बई मेंअचानक इकट्ठे हो जाते हैं ये कोई एकजुट संगठित ताकत नहीं हैकिसी सोची-समझी साज़िश का हिस्सा भी नहीं हैइनके कोई

बेपरवाह लोग पर कविता Read More »

कोरोना चालीसा पर कविता

Uncategorized

कोरोना चालीसा पर कविता नर रसना के स्वाद का, कोरोना परिणाम।चमगादड़ के सूप का, मचा हुआ कोहराम।।१।। करता कोई एक है, भरता ये संसार।घूम -घूम वो नर करें, व्याधि का संचार।।२।। *चौपाइयाँ* कैसे कटे दिवस हे भाई ।लगता जीव लता मुरझाई।।१।। संकट खड़ा करें हरजाई ।कैसे इसकी हो भरपाई।।२।। महा शाप ये इस सृष्टि का

कोरोना चालीसा पर कविता Read More »

Scroll to Top