हिंदी कविता

भगत सिंह का पुकार

हिंदी कविता

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद भगत सिंह जी का कार्य व देश के लिए योगदान का उल्लेख कविता के माध्यम से किया गया है।

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NATURE

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन- विभा श्रीवास्तव

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन किलकारियाँ, खिलखिलाहट, अठखेलियाँ हवा के संग ….हमे बहुत याद आता है।बादलो का गर्जना ,बिजलियों का कड़कना ,और इन्द्रधनुष के रंग….हमे भी डराता और हसाता है। तितलियों का उड़ना ,भौरो का गुनगुनाना ,ये सब …..तुम्हे भी तो भाता है।सब कुछ था,है ,पर…..रहेगा या नही ,ये नही पता…, बरसो से खड़े रहकर

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क्यों जाति की बात करें

हिंदी कविता,

क्यों जाति की बात करें(१६,१६) जब जगत तरक्की करता हो,देश तभी उन्नति करता है।जब मानव सहज विकास करे,क्यों जाति द्वेष की बात करें। जाति धर्म मे पैदा होना,मनुजों की वश की बात नहीं,फिर जाति वर्ग की बात करेंयह सच्ची अच्छी बात नहीं। माना जो पहले बीत गया,कुछ कर्मी वर्ग अवस्था थी,नवयुग मे नया प्रभात करें,क्यों

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प्रकृति का प्रचंड रूप

प्रकृति का प्रचंड रूप

प्रकृति और पर्यावरण, हिंदी कविता

पर्यावरण संरक्षण के लिए पृथ्वी के उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग ही मानव जीवन के लिए उपयुक्त है।

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व्यक्तित्व विशेष कविता संग्रह

मुंशी प्रेमचंद जी साहित्यकार थे ऐसे

हिंदी कविता

महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद जी के प्रति 141 वीं जयंती (31 जुलाई )पर विशेष कविता

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व्यक्तित्व विशेष कविता संग्रह

कलम के सिपाही -मुंशी प्रेमचंद जी

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कलम के सिपाही -मुंशी प्रेमचंद जी मेरे मूर्धन्य मुंशी प्रेमचंद जी थे बड़े ” कलम के सिपाही “अब…….”भूतो न भविष्यति”हे ! मेरे जन जन के हमराही ! उपन्यास सम्राट व कथाकारजनमानस के ये साहित्यकार,गरीब-गुरबों की पीड़ा लिखतेथे अन्नदाता के तुम पैरोकार ! समस्याएँ,,,,संवेदनाओं काकरते थे मार्मिक शब्दांकन,‘झंकृत और चमत्कृत’ रचनाहोते भावविभोर चित्रांकन ! ये रूढ़िवादी

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व्यक्तित्व विशेष कविता संग्रह

मुंशी प्रेमचंद जी पर दोहे

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मुंशी प्रेमचंद जी पर दोहे प्रेमचंद साहित्य में,एक बड़ी पहचान।कथाकार के नाम से,जानत सकल जहान।। उपन्यास लिखते गए,कफ़न और गोदान।प्रेमचंद होते गए,लेख क्षेत्र सुल्तान।। रही गरीबी बचपना,करते श्री संघर्ष।मिली एक दिन नौकरी,जीवन में उत्कर्ष।। गाँधी के सानिध्य में,प्रेम किए सहयोग।फौरन छोड़ी नौकरी,समय लेख उपयोग।। ✒️ *परमेश्वर अंचल*

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उफ! ये सावन जब भी आता है

हिंदी कविता

“उफ!ये सावन जब भी आता है” वो बचपन की मस्ती,वो तोतली बोली,वो बारिश का पानी,और बच्चों की टोली,वो पहिया चलाना और नाव बनाना,माँ का बुलाना और हमारा न आना,वो अनछुए पल याद दिलाता है “उफ!ये सावन जब भी आता है”।।।1।। लड़कपन में लड़ना और फिर मचलनादोस्तों का मनाना हमें फिर मिलानामैदान के कीचड़ में गिरना-गिरानाऔर

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