हिंदी कविता

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जीवन का पाठ है योग / अरुणा डोगरा शर्मा

समाज और यथार्थ,

अरुणा डोगरा शर्मा की “यह”जीवन का पाठ है योग” कविता सरल, प्रवाहमयी और प्रेरणादायक भाषा में रची गई है। कविता का उद्देश्य योग के सामूहिक अभ्यास के महत्व को रेखांकित करना और पाठकों को इसे अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना है। जीवन का पाठ है योग /अरुणा डोगरा शर्मा भौतिक सुखों को […]

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आओ मिल कर योग करें हम / शिवांगी मिश्रा

समाज और यथार्थ,

शिवांगी मिश्रा की कविता “आओ मिल कर योग करें हम” योग के सामूहिक और सामाजिक महत्व को उजागर करती है। इस कविता में कवयित्री ने योग को न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य और शांति का साधन बताया है, बल्कि इसे एक सामूहिक गतिविधि के रूप में भी प्रस्तुत किया है जो समुदाय और समाज में एकता

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योग बने मुस्कान हमारी / डा० भारती वर्मा बौड़ाई

समाज और यथार्थ,

डा० भारती वर्मा बौड़ाई की यह कविता सरल, प्रवाहमयी और प्रेरणादायक भाषा में रची गई है। कविता का उद्देश्य योग के लाभों को सरल और सहज रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इसे आसानी से समझ सकें और अपने जीवन में शामिल कर सकें। योग बने मुस्कान हमारी / डा० भारती वर्मा बौड़ाई योग

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योग से दिन है सुहाना / कवि डिजेंद्र कुर्रे “कोहिनूर”

मन और भावनाएँ,

डिजेंद्र कुर्रे “कोहिनूर” की यह कविता सरल, प्रवाहमयी और प्रेरणादायक भाषा में रची गई है। कविता का उद्देश्य पाठकों को योग के लाभों से अवगत कराना और उन्हें इसे अपने जीवन में शामिल करने के लिए प्रेरित करना है। योग से दिन है सुहाना / कवि डिजेंद्र कुर्रे “कोहिनूर” योग से दिन है सुहाना,  योग को

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योग भगाये रोग / कंचन कृतिका

प्रकृति और पर्यावरण,

कंचन कृतिका की कविता “योग भगाये रोग” योग के शारीरिक और मानसिक लाभों को उजागर करती है। इस कविता में योग के महत्व और उसके द्वारा रोगों के निवारण का वर्णन किया गया है। कवि ने योग को एक चमत्कारी उपाय के रूप में प्रस्तुत किया है, जो न केवल शारीरिक बीमारियों से छुटकारा दिलाता

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सहज योग तुम कर लेना / राजेश पाण्डेय *अब्र*

हिंदी कविता

इस कविता में कवि राजेश पाण्डेय ‘अब्र’ सहज योग को अपनाने और उसके लाभों के बारे में बता रहे हैं। सहज योग एक ऐसी साधना है जो सरलता से की जा सकती है और इसके माध्यम से व्यक्ति आत्मज्ञान और शांति की प्राप्ति कर सकता है। यह योग व्यक्तिगत विकास, मानसिक शांति, और आत्मा के

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योग को अपनाना है/ प्रियांशी मिश्रा

हिंदी कविता

“योग को अपनाना है” यह कविता प्रियांशी मिश्रा द्वारा लिखी गई है। इस कविता में वे योग के महत्व को समझाने और इसे अपने जीवन में शामिल करने के प्रेरणात्मक संदेश को व्यक्त करती हैं। योग को एक उपयुक्त तकनीक मानकर उसके लाभों को साझा किया गया है। योग को अपनाना है/ प्रियांशी मिश्रा योग

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करो योग रहो निरोग /बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

करो योग रहो निरोग” एक प्रसिद्ध हिंदी कविता है, जिसे बाबूराम सिंह ने लिखा है। यह कविता योग के महत्व पर आधारित है और योग के लाभों को संदेश में उजागर करती है। इस कविता में योग को जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका देने की प्रेरणा दी गई है, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को

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योग पर दोहे /डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”

हिंदी कविता

योग पर दोहे में डिजेंद्र कुर्रे योग के महत्व को बयां करते हैं, कि योग हमें शांति और सजावट प्रदान करता है, योग पर दोहे /डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर” योग क्रिया तन को करें, अतुल परम बलवान।इसके पुण्य प्रभाव से, मिटते छल अभिमान।। चरक पतंजलि ने दिया, हमको अनुपम योग।दूर करें तन से सदा, सरल सहज

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हिंदू दर्शन के षड्दर्शन (छः दर्शन) में से एक है योग

समय और जीवन दर्शन

 योग, हिंदू दर्शन के षड्दर्शन (छः दर्शन) में से एक है। योग का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना। शारीरिक व्यायाम ,मुद्रा (आसन) को ध्यान (मन) से जोड़ना है इस हेतु सांस लेने की तकनीक को सीखना होता है. शरीर को आत्मा से जोड़ना है और फिर परमात्मा या प्रकृति या ईश्वर से जुड़ना होता है . हिंदू

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