हिंदी कविता

पुष्प की अभिलाषा

पुष्प की अभिलाषा हिंदी कविता

देशभक्ति, हिंदी कविता

“पुष्प की अभिलाषा” माखनलाल चतुर्वेदी की एक प्रसिद्ध कविता है, जिसमें एक पुष्प (फूल) की इच्छाओं और उसकी बलिदानी भावना का सुंदर वर्णन किया गया है। इस कविता के माध्यम से, कवि ने देशभक्ति और आत्म-समर्पण की भावना को प्रस्तुत किया है। पुष्प की अभिलाषा / माखनलाल चतुर्वेदी चाह नहीं, मैं सुरबाला केगहनों में गूँथा […]

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manu baker

धाकड़ मनु भाकर / शिवराज चौहान, हरियाणा

नारी जीवन और संवेदना

मनु भाकर एक भारतीय शूटर हैं जिन्होंने अपनी युवा उम्र में ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शूटिंग में कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उनका पूरा नाम मनु भाकर है और वह हरियाणा, भारत से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने पिस्टल शूटिंग इवेंट्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। धाकड़ मनु भाकर/ शिवराज चौहान, हरियाणा हरियाणा

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दीदी की डायरी पर कविता/ जानसी पटेल

हिंदी कविता

दीदी की डायरी पर कविता/ जानसी पटेल दीदी की डायरी में, अनगिनत कहानियाँ,सपनों की बातें और बचपन की नादानियाँ। रंग-बिरंगे पन्ने, सजी यादों से प्यारे,सुख-दुःख के पल, हर पन्ने में गुज़ारे। पहला प्यार, पहली दोस्ती की कहानी,स्कूल के दिन, और परीक्षा की निशानी। माँ की डाँट, पापा का प्यार भरा पत्र,हर पन्ना बोले, जैसे हो

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doha sangrah

मनीभाई के दोहे ( Manibhai ke Dohe)

प्रकृति और पर्यावरण

मनीभाई के दोहे (1) जंगल मंदिर बन गये , शहर हुए अब खेत।मानव के करतूत से , हो गये पशु निश्चेत।। (2) मानव तेरी भूख ही , मांस नोच के खाय।है तू हिंसक पशु बड़ा, देखत सब थर्राय। (3) मानव रक्षक है प्रकृति ,मानव बन शैतान ।छोटे से सुख के लिए,काटत मुर्गा श्वान।। (4) प्रीत

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व्यक्तित्व विशेष कविता संग्रह

मन मस्त हुआ तब क्यूँ बोले / कबीरदास

हिंदी कविता

मन मस्त हुआ तब क्यूँ बोले / कबीरदास मन मस्त हुआ तब क्यूँ बोले हीरा पायो गाँठ गठियायो बार-बार बा को क्यूँ खोले हल्की थी तब चढ़ी तराजू पूरी भई तब क्यूँ तओले सूरत-कलारी भई मतवारी मदवा पी गई बिन तोले हंंसा पाए मानसरोवर ताल तलैया क्यूँ डोले तेरा साहब है घर माँ हीं बाहर

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Hindi Poem ( KAVITA BAHAR)

मैं जीने लगी

हिंदी कविता

मैं जीने लगी वक्त का सरकनाऔर उनके पीछेमेरा दौड़ना  ये खेल निरन्तर   चल रहा हैकहाँ थे औरकहाँ आ गये।   कलेन्डर बदलता रहा   पर मैं यथावतजीने की कोशिशभागंमभाग जिन्दगी    कितना समेटूमैं जीवन रुपी जिल्दसंवारती रही, औरपन्ने बिखरते गये।   एक कहावत सुनीऔर जीवन सुखी हो गयाआप सब भी सुनिएजब दर्द और कड़वी गोलीसहन होने लगे  समझो जीना

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आंसू पर कविता

हिंदी कविता

आंसू पर कविता दर्द जब पिघलता है तो बह आते हैं आँसूसुख में हों या हो दुख में रह जाते हैं आँसू विकट वेदना पीर बहेआघातों के तीर सहेकंपित अधरें मौन रहेगूंगी वाणी व्यथा कहे सूनी सूनी  पलकों पर हिमकण जम जाते हैं आँसू वेदना जब गीत गाती कोख पीड़ा की भर जाती विदीर्ण होते

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व्यक्तित्व विशेष कविता संग्रह

राम प्रसाद बिस्मिल की लिखी कविताएं

मन और भावनाएँ

रामप्रसाद बिस्मिल एक क्रान्तिकारी थे जिन्होंने मैनपुरी और काकोरी जैसे कांड में शामिल होकर ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध बिगुल फूंका था। वह एक स्वतंत्रता संग्रामी होने के साथ-साथ एक कवि भी थे और राम, अज्ञात व बिस्मिल के तख़ल्लुस से लिखते थे, उनके लेखन को सर्वाधिक लोकप्रियता बिस्मिल के नाम से मिली थी। पेश हैं

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सादगी का रंग / राष्ट्रीय सादगी दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

यहाँ राष्ट्रीय सादगी दिवस के अवसर पर एक कविता प्रस्तुत की जा रही है: सादगी का रंग सादगी का रंग हो प्यारा,सीधा-सादा जीवन हमारा। चमक-दमक को भूल चलें हम,सादगी में ही सुख पाएं हम। कम में खुश रहना सिखाएं,सादगी का पाठ पढ़ाएं। भव्यता में न फंसे जीवन,सादगी में हो सच्चा धन। जीवन का यही है

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वर्ल्ड जूनोसिस डे पर नारे

समाज और यथार्थ

वर्ल्ड जूनोसिस डे हर साल 6 जुलाई को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य जूनोटिक रोगों (पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले रोग) के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन लुई पाश्चर द्वारा पहली सफल रेबीज वैक्सीन का परीक्षण करने की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। जूनोसिस रोगों को रोकने के लिए अच्छे स्वच्छता उपाय, पशुओं का टीकाकरण और उचित पशु चिकित्सा देखभाल महत्वपूर्ण हैं।

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छत्तीसगढ़ कविता

छत्तीसगढ़ परिचय (दोहा छंद )/ वेदकांति रात्रे “देविका”

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ परिचय (दोहा छंद ) नामकरण पर राज्य के, मत हैं विविध प्रकार।चेदिसगढ़ था नाम शुभ , हीरा के अनुसार।। रहते थे छत्तीस कुल , जरासंध के काल ।नामकरण पर राज्य के , कहे वेगलर हाल ।। चेदी जनपद काल में, चेदिसगढ़ सुखधाम।चेदिसगढ़ से है बना, इस प्रदेश का नाम ।। शासक थे जो कल्चुरी

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सावन के दोहे/ नरेन्द्र वैष्णव “सक्ती”

हिंदी कविता

नरेंद्र वैष्णव जी का “सावन के दोहे”” काव्य विशेष रूप से उनकी कविताओं में एक प्रमुख पहलू हैं। वे उत्तर भारतीय संस्कृति और भारतीय जीवन-दर्शन को अपनी कविताओं में प्रकट करने वाले प्रमुख कवि रहे हैं। सावन के दोहे/ नरेन्द्र वैष्णव “सक्ती” बारिश की यादें लिए , सिसके सावन देख ।वर्णन करना चाहता , काव्य

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