महा देश का ग्रंथ महाभारत
हिंदी कवितामहा देश का ग्रंथ महाभारत अवसर मिलता सर्वदा,पर मन का अभिमान।आलस और प्रमाद सेनही सकें पहचान।।तब गुरुवर, गणनाथ मिलि,पथ की दें पहचान।जो जाने वे कर लिए ,निज हित करके ध्यान।।हर मानव का ध्येय हो,पूजा तीन प्रकार।पित्र, गुरू और देव का ,पूजन से सत्कार।।जीवन के इस युद्ध मे,प्रबल बुद्धि जब होय।तब डगमग श्रद्धा रहे,दुख भोगे हर
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