कविता’ साहित्य की वह विधा है जिसमें किसी मनोभाव को कलात्मक रूप से किसी भाषा के द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है। काव्य वह वाक्य रचना है जिससे चित्त किसी रस या मनोवेग से पूर्ण हो। अर्थात् वह जिसमें चुने हुए शब्दों के द्वारा कल्पना और मनोवेगों का प्रभाव डाला जाता है.

Kavita ‘is the genre of literature in which a sentiment is artistically expressed by a language. Poetry is the syntax that makes the mind complete with emotions. That is, in which imagination and emotions are effected by the chosen words.

दहेज प्रथा अभिशाप है – बाबूराम सिंह

दहेज प्रथा अभिशाप है------------------------------- दानव क्रूर दहेज अहा ! महा बुरा है पाप ।जन्म-जीवन नर्क बने,मत लो यह अभिशाप।।पुत्रीयों के जीवन में ,लगा दिया है आग।खाक जगत में कर रहा,आपस…

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हिंदी सचमुच महान है -आषीश कुमार

हिंदी सचमुच महान हैहिंदी महज भाषा नहींहम सब की पहचान हैजोड़े रखती मातृभूमि सेयह भारत की शान हैहिंदी में है मिठास भरीसहज सरल आसान हैभावनाओं से ओतप्रोत हैजो ना समझे…

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हिंदी हमारी भाषा – सुशी सक्सेना

हिंदी हमारी भाषा,युगों-युगों से पूजी जाती, हिंदी हमारी मातृभाषा।भारत देश के माथे की बिंदी, हमारी राष्ट्रभाषा।अंग्रेजों को मार भगाया, फिर भी रह गई अंग्रेजी।हिंदी की है साख निराली, इसके जैसा…

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सलिल हिंदी – डाॅ ओमकार साहू

सलिल हिंदी (सरसी छंद)*स्वर व्यंजन के मेल सुहाने, संधि सुमन के हार।**रस छंदों से सज धज आई, हिंदी कर श्रृंगार..*वर्णों का उच्चारण करतें, कसरत मुख की जान।मूर्धा जिह्वा कंठ अधर…

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हिंदी का पासा – उपेन्द्र सक्सेना

पलट गया हिंदी का पासागीत-उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेटहिंदी बनी राजभाषा ही, लेकिन नहीं राष्ट्र की भाषाक्षेत्रवाद के चक्कर में ही, पूरी हो न सकी अभिलाषा।पूर्वोत्तर के साथ मिले जब, दक्षिण के…

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मातृ भाषा पर कविता – विनोद कुमार चौहान

देख रहा है बिनोद++##++##++##++##++##++देख रहा है बिनोद,मातृभाषा की क्या दुर्दशा है?खुद तो बोलने को कतराते हैं,और विश्व भाषा बनाने की मंशा है।देख रहा है बिनोद,फर्राटेदार अंग्रेजी को शान समझते हैं।जो…

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परवाह करने वाले – विनोद सिल्ला

परवाह करने वालेहोते हैं कम हीपरवाह करने वालेहोता है हर एक इस्तेमाल करने वालावास्तव मेंपरवाह करने वालेइस्तेमाल नहीं करतेवहीं इस्तेमाल करने वालेपरवाह नहीं करते पहचानिएकौन हैं परवाह करने वालेकौन हैं…

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श्रीराम पर कविता – बाबूराम सिंह

कविता भक्त वत्सल भगवान श्रीराम -----------------------------------------सूर्यवंशी सूर्यकेअवलोकि सुचरित्र -चित्र,तन - मन रोमांच हो अश्रु बही जात है।सुखद- सलोना शुभ सदगुण दाता प्रभु ,नाम लेत सदा भक्त बस में हो जातहैं।नाम…

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सुफल बनालो जन्म कृष्णनाम गायके – बाबूराम सिंह

कवितासुफल बनालो जन्म कृष्णनाम गायके-----------------------------------------------कृष्ण सुखधाम नाम परम पुनीत पावन ,पतित उध्दार में भी प्यार दिखलाय के।कर की मुरलिया से मोहे त्रिलोक जब ,सुफल बना लो जन्म कृष्ण नाम गाय…

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