July 2020

आक्रोश पर निबंध – मनीभाई नवरत्न

समाज और यथार्थ

“कभी रोष है ,तो कभी जोश है।

मन में उफनता , वो ‘आक्रोश’ है।

मदहोश यह, तो कहीं निर्दोष है।

परदुख से उत्पन्न ‘आक्रोश’ है।”

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हिन्दी कविता: वक्ता पर कविता– नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

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वक्ता पर कविता- नरेन्द्र कुमार कुलमित्र हे मेरे प्यारे वक्तावाक कला में प्रवीणबड़बोला महाराजबातूनी सरदारकृपा करके हमें भी बताओकि तुम इतना धारा प्रवाहकैसे बोल लेते हो..?बिना देखे,बिना रुकेघंटों बोलने की कलाआख़िर तुमने कैसे सीखी है..?दर्शकों कोगुदगुदाने वाली कविताएँजोश भरने वाली शायरियांऔर नैतिक उपदेश वालेसंस्कृत के इतने सारे श्लोकतुमने भला कैसे याद किए हैं..?मुझे नहीं लगताकि

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बेटी पर कविता / लक्ष्मीकान्त ‘रुद्रायुष’

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बेटी पर कविता / लक्ष्मीकान्त ‘रुद्रायुष’ सुख औ समृद्धि कारी,होती फिर भी बेचारी,क्यों ना जग को ये प्यारी,बेटी अभिमान है।माता का दुलार बेटी,पिता का है प्यार बेटी,खुशी का संसार बेटी,सबका सम्मान है।सूना घर महकाती,चिड़िया सी च-चहाती,“कांत” मन बहलाती,बेटी स्वभिमान है।प्यारा उपहार कोई,बेटी जैसा नही कोई,रिश्ते सब निभाये वोही,बेटी पहचान है ” कुण्डलियाँ “ बेटी स्वाभिमान

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हिन्दी कविता: रायपुर सेंट्रल जेल में-नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

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रायपुर सेंट्रल जेल में-नरेन्द्र कुमार कुलमित्र रायपुर में पढ़ता था मैंपंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालयथा दर्शनशास्त्र का विद्यार्थीजन्मभूमि सा प्यारा था आज़ाद छात्रावास गाँव वालों की नज़रों मेंथा बड़ा पढन्तामेरे बारे में कहते थे वे–“रइपुर में पढ़ता है पटाइल का नाती।” मेरे गाँव के पास का एक गाँवजहाँ रहती थी मेरी फुफेरी दीदीफुफेरा जीजा था जो

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हिन्दी कविता: कारगिल विजय दिवस की गाथा

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कारगिल विजय दिवस की गाथा;-
*सुन्दर लाल डडसेना”मधुर”*
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.) 493558

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हिन्दी कविता : जार्ज फ्लॉयड पर कविता- नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

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जार्ज फ्लॉयड पर कविता- जार्ज फ्लॉयड तुम आदमी थेतुम आदमी ही रहेपर तुम्हें पता नहींकि शैतानी नज़रों मेंआदमी होना कुबूल नहीं होताआख़िर तुम मारे गए काश तुम जान गए होतेकि तुम्हारा जिंदा रहने के लिएतुम्हारा आदमी होना ज़रूरी नहीं थाजितना जरूरी थातुम्हारी चमड़ी का गोरा रंग जार्ज फ्लॉयडकाश की तुम्हेंगिरगिट की तरहअपनी चमड़ी का रंग

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सूर घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

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घनाक्षरी छंद विधान:सूर घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ सूर घनाक्षरी विधान ३० वर्ण(८८८६) प्रतिचरण चार चरण समतुकांत चरणांत की कोई शर्त नहीं है। सूर घनाक्षरी विधान का उदाहरण . __जल रक्षण__ मनुज भूल नादानी,आज समय की मानी,बचत वर्षा का पानीसोचो कुण्ड बने। नही बहा ये अमृतबचा नीर से प्राकृत,धरा हेतु है सुकृतटांके कुण्ड बने। ताल तलैया बापीगहराई

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देव घनाक्षरी विधान -बाबूलाल शर्मा ‘विज्ञ’

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देव घनाक्षरी विधान -बाबूलाल शर्मा ‘विज्ञ’ देव घनाक्षरी विधान ३३वर्ण (८८८९) प्रतिचरण चार चरण समतुकांत चरणांत नगण१११(पुनरावृत्ति) (जैसे कदम कदम) देव घनाक्षरी विधान का उदाहरण __कदम-कदम__ लड़ें सीमा पर हम,पातकी जाएगा थम,कारवाँ चले बढ़ेगा,चलना कदम-कदम। पाक पड़ौसी बे दम,सुधारो उसको तुम,करना नहीं रहम,वह तो छदम छदम। चीन भाई धोखे सम,फैलता है काला तम,भारती माता पावन,झूठ

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