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सलाम हुजूर तुझे मेरा सलाम
इस फूल में कांटा है
तू यूं ना थम
फूफा रिश्ता पर कविता
ऐसे में तू जरा हमसे नजर तो मिला
अधखिली कली सी तुम अनारकली
बेकरार दिल तुझे हुआ क्या
अपना प्यारा बीटीआई
हर शाम सुबह होने का देती है पैगाम।
एक पेड़ की दो शाखाएं
आती है खुशियां थोक में
घर के कितने मालिक -मनीभाई नवरत्न
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