कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

ग्रहों पर कविता

हिंदी कविता

ग्रहों पर कविता तुम जो हो जैसे होउतना ही होना तुम्हारे लिए पर्याप्त नहीं लग रहा हैं तुम जो भी हो उसमें और ‘होने’ के लिएकुछ लोगों को और भी जोड़ना चाहते होबहुत सारे या अनगिनत व्यक्तियों को अपने व्यक्तित्व में लाना चाहते होताकि तुम अपने को साबित कर सकोइस फेर में असंख्य व्यक्तियों से […]

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जीत पर कविता

हिंदी कविता

जीत पर कविता जब तक स्वास है ,करना अभ्यास है ।चित से प्रयास करें ,पूरी हर आस हो। परिश्रमी सच्चा जो,सफल रहे सदा वो।लक्ष्य मन में रखें,मंजिल ना दूर हो। बड़ों का आदर जहां ,सुस्वर्ग होता वहां।वंदन मन से करो ,जड़ों से जुड़े रहो । शपथ आज लेनी है ,विटप सम धीर हो ।कदम ना

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पानी पर कविता

हिंदी कविता

पानी पर कविता क्षिति जल पावक नभ पवन,जीवन ‘विज्ञ’ सतोल।जीवन का आधार वर,पानी है अनमोल।। मेघपुष्प ,पानी सलिल, आप: पाथ: तोय।*विज्ञ* वन्दना वरुण की, निर्मल मति दे मोय।। जनहित जलहित देशहित, जागरूक हो *विज्ञ*।जीवन के आसार तब, जल रक्षार्थ प्रतिज्ञ।। वारि अम्बु जल पुष्करं, अम्म: अर्ण: नीर।उदकं, घनरस शम्बरं, *विज्ञ* रक्ष मतिधीर।। सरिता तटिनी तरंगिणी,

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mahapurush

जलियांवाला बाग की याद में कविता

नारी जीवन और संवेदना

जलियांवाला बाग की याद में कविता जलियांवाला बाग के अमर शहीदों को सलाम।अमर कुर्बानी का पावन अमृतसर शुभ धाम।।तड़ातड़ चली थी निहत्थों पर अनगिनत गोलियां।कसूर था बस बोल रहे थे इंकलाब की बोलियाँ।।जनरल डायर की बर्बरता की चली थी अंधाधुंध गोलियां।महिलाओं बच्चों पर खेली गई खून की होलियां।।निर्दयी जनरल डायर को तनिक भी दया नहीं

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धीरे धीरे पर कविता-मनोज बाथरे

हिंदी कविता

धीरे धीरे पर कविता बिखरती हुई जिंदगीवीरान सी राहेंसमय गुजर रहा हैधीरे धीरेहम अपने अस्तित्व कीतलाश मेंनिकल पड़े उनराहों परमन विचलित हैउदास हैफिर भी कर रहे हैंमंजिलें तलाश हमधीरे धीरे

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ख्याल पर कविता

हिंदी कविता

ख्याल पर कविता पहली रोटीगाय को दीअंतिम रोटी कुत्ते कोकिड़नाल कोसतनजा भी डाल आयामछलियों कोआटा भी खिलायाश्राद्ध में कौवों को भीभौज करायानाग पंचमी परनाग को भीदूध पिलायाभुखमरी के शिकारवंचितों काख्याल न आयानिवाले केअभाव में जिन्होंनेजीवन गंवाया –विनोद सिल्ला©

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मजबूरी पर कविता-मनोज बाथरे

हिंदी कविता

मजबूरी पर कविता मजबूरी इंसान कोक्या से क्याबना देती हैकही ऊपर उठाती हैतो कहीझुका देती हैइन्ही के चलतेइंसान अपनीमजबूरी के चलतेएकदम हताश होजाता हैपर इससे निकलनेके लिएप्रयास बेहद जरूरी हैमनोज बाथरे चीचली

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खुद की तलाश पर कविता-मनोज बाथरे

हिंदी कविता

खुद की तलाश पर कविता जिंदगी में भीकैसे कैसेमोड़ आते हैंजिनमें कुछ लोगतो अपनीअलग पहचानबना लेते हैंऔर कुछ लोगगुमनामी के अंधेरों मेंको जाते हैंऔर फिरखुद की तलाशकरतें हैं।।

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गरीबी पर कविता (17 अक्टूबर गरीबी उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर कविता )

हिंदी कविता,

गरीबी पर कविता गरीबी तू इतना रूलाया न कर हमेंजो मर गये तो, कहाँ पे तेरा आसरा है?मज़ाक उड़ाया सबके सामने कुछ यूँवाह भाई! अमीरों सा तेरा भी नखरा है? ?मनीभाई नवरत्न छत्तीसगढ़

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दौसा की सैर

हिंदी कविता

दौसा की सैर ??आइए आपकोहमारे यहाँ दौसा की सैरकरवादें ??मेरा जिला,मेरी बोली,मेरा गाँव ,संस्कृति,रीति,पर्यटन,इतिहास,फसलसब से रुबरू…..??..तो आइए??.? *दौसा दर्शन* ?बी.एल.शर्मा—-?—- आओ सैर कराँ दौसा की,नामी बड़गूजर धौंसा की।सूप सो किल्लो डूँगर पै।नीला कंठाँ दौसा की।गाँवा कस्बाअर् शहराँ की,देवाँ नगरी दौसा ..की.? यातो जिलो बड़ो ही नामी,ईंका माणस भी सर नामी।पचपन याद करै बचपन कीमनसां पढ़

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खामोशियों पर कविता

हिंदी कविता

खामोशियों पर कविता अपनी भावनाओं मेंख़ामोश विचारों सेरखकरमन को दूर देखामौन दरख्तो कोसिसकते हुए देखाहृदय से बिछुड़ती हुईभावनाओं की भावनाको देखाजो तलाश रही थीउन खामोशियों मेंअपनों को।।

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जाति पर कविता

हिंदी कविता

जाति पर कविता जातिजाती ही नहींबहुत हैं गहरीइसकी जड़ेंजिसे नितसींचा जाता हैउन लोगों द्वाराजिनकी कुर्सी कोमिलता है स्थायित्वजाति सेजिनका चलता है व्यवसायजाति सेजिन्हें मिला है ऊंचा रुतबाजाति सेजिन्हें परजीवी बनायाजाति नेवे चाहते हैंउनकी बनी रहे सदैवजाति आधारित श्रेष्ठताभले ही इससेकिसी काकितना ही शोषणक्यों न हो? -विनोद सिल्ला©

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