कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

किसान खेत जोतते हुए

किसान की दशा पर कविता

हिंदी कविता

किसान की दशा पर कविता देख तोर किसान के हालका होगे भगवान !कि मुड़ धर रोवए किसान,ये का दुख दे भगवान !! पर के जिनगी बड़ सवारें,अपन नई थोरको फिकर जी !बजर दुख उठाये तन म,लोहा बरोबर जिगर जी !!पंगपंगावत बेरा उठ जाथे ,तभे होथे सोनहा बिहान !कि मुड़ धर रोवए किसान !! झुमत -गावत

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हनुमत वंदना

हिंदी कविता

हनुमत वंदना राम नाम जाप कर, चित्त निज साफ कर,पवनसुत ध्यान धर,प्रभु को पुकारिये।भेद भाव भूल कर, क्रोध अहं नाश कर,बजरंगी शरण जा, जीवन सुधारिये।।राम भक्त हनुमान, करें नित्य गुणगानमंगल को पूज कर, जीवन सँवारिये।लाल देह सर्व प्रिय,सियाराम बसें हियलडुअन के भोग हों, आरती उतारिये। प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, 25 फरवरी 2020

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संस्कारों पर कविता

समाज और यथार्थ

संस्कारों पर कविता बीज रोप दे बंजर में कुछ,यूँ कोई होंश नहीं खोता।जन्म जात बातें जन सीखे,वस्त्र कुल्हाड़ी से कब धोता। संस्कृति अपनी गौरवशाली,संस्कारों की करते खेती।क्यों हम उनकी नकल उतारें,जिनकी संस्कृति अभी पिछेती।जब जब अपने फसल पकी थी,पश्चिम रहा खेत ही बोता।बीज रोप दे बंजर में कुछ,यूँ कोई होंश नही खोता। देश हमारा जग

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कवि निमंत्रण पर कविता

हिंदी कविता

कवि निमंत्रण पर कविता मित्रों तुम आनाआज मेरी कविता पाठ है कविता पाठ के बादतुम्हारे आने-जाने का खर्चा दूँगा शाम को पार्टी होगीमिलकर जश्न मनाएंगेजैसे हर बार मनाते हैं बस एक गुज़ारिश हैमहफ़िल मेंजब मैं कविता पढूँगामेरी हर पंक्तियों के बादतुम सभी एक साथवाह- वाह जरूर कहना कविता पढ़ने के बादजब मैं धन्यवाद बोलूँतुम ज़ोरदार तालियां बजाना

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अप्सरा पर कविता

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अप्सरा पर कविता बादलो ने ली अंगड़ाई,खिलखलाई यह धरा भी!हर्षित हुए भू देव सारे,कसमसाई अप्सरा भी! कृषक खेत हल जोत सुधारे,बैल संग हल से यारी !गर्म जेठ का महिना तपता,विकल जीव जीवन भारी!सरवर नदियाँ बाँध रिक्त जल,बचा न अब नीर जरा भी!बादलों ने ली अंगड़ाई,खिलखिलाई यह धरा भी! घन श्याम वर्णी हो रहा नभ,चहकने खग

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शिव भक्ति गीत -बाबूलाल शर्मा

आध्यात्म और भक्ति

शिव भक्ति गीत -बाबूलाल शर्मा प्रस्तुत कविता शिव भक्ति गीत आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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पत्थर दिल पर कविता

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पत्थर दिल पर कविता लता लता को खाना चाहे,कली कली को निँगले!शिक्षा के उत्तम स्वर फूटे,जो रागों को निँगले! सत्य बिके नित चौराहे पर,गिरवी आस रखी हैदूध दही घी डिब्बा बंदी,मदिरा खुली रखी है!विश्वासों की हत्या होती,पत्थर दिल कब पिघले!लता लता को खाना चाहेकली कली को निँगले! गला घुटा है यहाँ न्याय का,ईमानों का सौदा!कर्ज

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हारे जीत पर दोहे

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हारे जीत पर दोहे पीर जलाए आज विरह फिर,बनती रीत!लम्बी विकट रात बिन नींदे, पुरवा शीत! लगता जैसे बीत गया युग, प्यार किये!जीर्ण वसन हो बटन टूटते, कौन सिँए!मिलन नहीं भूले से अब तो, बिछुड़े मीत!पीर जलाए आज विरह फिर, बनती रीत! याद रहीं बस याद तुम्हारी, भोली बात!बाकी तो सब जीवन अपने, खाए घात!कविता

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प्रीत की बाजी पर कविता

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प्रीत की बाजी पर कविता कल्पना यह कल्पना है,आपके बिन सब अधूरी।गया भूल भी मधुशाला,वह गुलाबी मद सरूरी। सो रही है भोर अब यह,जागरण हर यामिनी को।प्रीत की ठग रीत बदली,ठग रही है स्वामिनी को।दोष देना दोष है अब,प्रीत की बाजी कसूरी।कल्पना यह कल्पना है,आपके बिन सब अधूरी। प्रीत भूले रीत को जब,मन भटक जाता

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राज दरबारी पर कविता

हिंदी कविता

राज दरबारी वो हैं बड़े लेखकनवाजा जाता है उन्हेंखिताबों सेदी जाती हैसरकार द्वारा सुविधाएंनाना प्रकार कीबदले मेंमिलाते हैं वे कदम-तालसरकार सेकर रहे हैं निर्वहनराज-दरबारियों कीपरम्परा काउनकी लेखनी नेमोड़ लिया मुंहआमजन की वेदना सेहो गए बेमुख संवेदना सेचंद राजकीयरियायतों के लिए -विनोद सिल्ला©

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सदमा पर लघु कथा

हिंदी कविता

सदमा पर लघु कथा दो महीने हो गये। शांति देवी की हालत में कुछ भी सुधार ना हुआ। पुरुषोत्तम बाबू को उनके मित्रों और रिश्तेदारों ने सुझाव दिया कि एक बार अपनी पत्नी को मनोचिकित्सक से दिखवा लें। पुरुषोत्तम बाबू को सुझाव सही लगा। अगले ही दिन अपने बड़े पुत्र सौरभ एवं पुत्रवधू संध्या के

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शिव-शक्ति पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

प्रस्तुत कविता शिव शक्ति पर आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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