November 2020

एक होनहार लड़का

हिंदी कविता

एक होनहार लड़का एक होनहार लड़कासच्चा,त्यागी, ईमानदार।उसके गुरु ने भी तालीम दी थीसच बोलने कीत्याग करने की ।ईमान निभाने की ।पर सिखाना थादो जून की रोटी जुटाने की शिक्षा ।आज भी लड़का खड़ा हैबड़ी सच्चाई से भूख-प्यास त्यागकर ।ईमानदारी से बेरोजगारों की कतार में। मनीभाई नवरत्न

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जब तूने हमें छोड़ के दौड़ लगाई

हिंदी कविता

जब तूने हमें छोड़ के दौड़ लगाई रचनाकार :मनीभाई नवरत्नरचनाकाल :15 नवम्बर 2020 तू चलता हैलोग बोलते हैंतू दौड़ता क्यूँ नहीं ?तू सबसे काबिल है।अब दौड़ता हूँफिर लोग बोलते हैंगिरेगा  तभी जानेगाहम क्यूँ चल रहे हैं ? तूने फिर बातें मानी,लोगों की सूनी।फिर से चला उनके साथलेकिन अबकी बारतेरी चाल ढीली है। वो बढ़ रहे

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क्या मैं उसे कभी जान पाया ?

हिंदी कविता

क्या मैं उसे कभी जान पाया ? कभी – कभीया बोलिये अब हर वक्त…मैं ढूंढता हूँ उसकोजो मेरे अंदर पड़ा है मौन।कहता कुछ नहींपर लगता हैउसकी आवाज दबा दी गई होकब ?ये भी तो मुझे मालूम नहीं ।लेकिन हाँ ! धीरे-धीरे… उसके अंदर के टीसमुझे जब चुभती,मैं उसे तबझूठी दिलासा देकरअक्सर शांत कर देता था

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स्कूल पर कविता

समय और जीवन दर्शन

स्कूल पर कविता चलो ऐसी शाला का निर्माण करेंजिसका प्रकाश सबको आलोकित करें।इस संस्था का सदस्य बन करहम स्वयं भी गौरवान्वित करें ।जहां गुरु शिष्य का नातापिता-पुत्र से आंका जाए ।जहां हरेक बालों मेंबहन का रूप झांका जाए ।पर सगुणों को अपनाकरस्वदुर्गुणों को विसर्जित करें।ऐसी शाला का निर्माण करेंजिसका प्रकाश सबको आलोकित करें ।नियमित शाला

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जीवन विद्या पर कविता

समाज और यथार्थ

जीवन विद्या पर कविता जीवन रूपी विद्या, होती है सबसे अनमोल ।जानके ये विद्या, तू जीवन के हर भेद खोल।। आया कैसे इस दुनिया में , समझ तू कौन है?इस प्रश्नों के उलझन में, “मनी “क्यों मौन है ?समझ कर इस रहस्य को,जानो अपना रोल।जानके ये विद्या को, तू जीवन के भेद खोल।। स्वयं में

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मैं तेरा बीज – पिता पर विशेष

हिंदी कविता

मैं तेरा बीज – पिता पर विशेष मैं तेरा बीज – पिता पर विशेषहे पिता!मैं तेरा बीज हूँ।माँ की कोख मेंजो अंकुरित हुया ।जब-जब भुख लगी माँ,तेरे धरा का रसपान किया।गोदी में बेल की भांतिलिपटा और भरपूर जीया। तेरे खाद-पानी से पितापौधा से बना पेड़।मेरे आँखो में सदा बसा रहामाली की छवि में एक ईश्वर।

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देख रहा हूँ कल – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

देख रहा हूँ कल सोते हुए जो “कल” को मैंने देखा था।वह महज सपना था ।आज इस पल फिर सेदेख रहा हूं “कल” मैं जागते हुए ।हां !यही अपना रहेगा।इस पल साथ हैं मेरे तीन दोस्त“जोश जुनून और जवानी “।और इन्ही के संग मुझे गढ़नी हैनित नूतन कहानी ।कल कुछ बोलता नासमझ सेनिशानी थी बालपन

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ननपन के सुरता (छत्तीसगढ़ी कविता)

हिंदी कविता,

ननपन के सुरता (छत्तीसगढ़ी कविता) ➖➖➖➖➖➖रचनाकार-महदीप जंघेलग्राम-खमतराई,खैरागढ़जिला- राजनांदगांव(छ.ग)विधा-छत्तीसगढ़ी कविता पहली के बात, मोर मन ल सुहाथे।ननपन के सुरता मोला अब्बड़ आथे।। होत बिहनिया अंगाकर रोटी ल,खाय बर अभर जावन।कमती खा के घलो,दाई के मया अउदुलार ले अघा जावन।।दूध दही मही अउ घीव घलो,जम के खावन।दिन भर खेलकूद के ,सब्बो ल पचावन।।तिहार के ढिलबरा कोचई कढ़ी,मोला

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छत्तीसगढ़ी गीत : हमर देश के हमर राज

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ी गीत : हमर देश के हमर राज हमर देश के हमर राज ,रखबो जेकर लाज गा।दीदी भई जम्मो रे संगी, करथे जेकर बर नाज गा।चिरई चिरकुन हामन जइसे,रिकिम-रिकिम के रंग बोली।बागे बगीचा मा जइसे ,करत राथे हंसी ठिठोली ।हमर मिलइ-जुलइ के देखे, झपटे सके ना बाज गा।दीदी भई जम्मो रे….. गांव शहर एके बरोबर

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ये मजहब क्यों है – एकता दिवश पर कविता

हिंदी कविता

ये मजहब क्यों है – एकता दिवश पर कविता ये मजहब क्यों है?ये सरहद क्यों है?क्यों इसके खातिर,लड़ते हैं इंसान ?क्यों इसके खातिर,जलते हैं मकान ?क्यों इसके खातिर,बनते हैं हैवान ?क्यों इसके खातिर,आता नहीं भगवान ?क्या करेंगे ऐसे मजहब का,जिसमें अपनों का चीत्कार है?क्या करेंगे ऐसे सरहद का,जिसमें खून की धार है?क्यों न सबका एक

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जब मैं तनहा रहता हूँ

हिंदी कविता

जब मैं तनहा रहता हूँ जब मैं तनहा रहता हूँ।खुद से बातें करता हूँ ।सुख की,दुख की ।छांव की, धुप की ।गलतियों पर सीख लेता हूँ ।कसम खाता हूँ आगे से,इन्हें ना दुहराने की ।जीत पर बधाई देता हूँ ।उत्साह बढ़ाता हूँ,नित आगे बढ़ने की ।कारनामे गढ़ने की ।मुश्किलों से लड़ने की ।एक तारा आसमाँ

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गुरु की महिमा – एन्०पी०विश्वकर्मा

हिंदी कविता

महर्षि वेद व्यासजी का जन्म आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही हुआ था, इसलिए भारत के सब लोग इस पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। जैसे ज्ञान सागर के रचयिता व्यास जी जैसे विद्वान् और ज्ञानी कहाँ मिलते हैं। व्यास जी ने उस युग में इन पवित्र वेदों की रचना की जब शिक्षा

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