मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

मनोरंजन नाम की सज़ा

हिंदी कविता

मनोरंजन नाम की सज़ा(The Punishment Called Entertainment) तुम मनोरंजन ढूँढते होक्योंकि भीतरगहरी ऊब है। जो जीवन से भाग रहा है,वही सबसे ज़्यादाहँसता दिखता है।और जो साहस करता है,वह अक्सरचुप और गंभीर। जिसे तुम आनंद कहते हो,वह केवल उत्तेजना है—थोड़ी देर की गुदगुदी।इसे कोई भी दयनीय पा सकता है,और यहीउसकी सज़ा है। यदि तुम्हें लगातार मज़ा

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जाओ, ज़िंदगी जियो”

हिंदी कविता

“एह! जाओ, ज़िंदगी जियो” दुनियाडरावने चेहरे पहनकर आती है,मास्क लगाकर,फुफकारते साँप दिखाकर,ड्रैगन की तरह गुर्राकर—बस तुम्हारी शांति हिलाने के लिए। और तुम?एक आँख खोलते हो,उसे देखते हो—और कहते हो,“एह?” फिर करवट बदलकरसो जाते हो। यही है असली मालिकाना हक़।यही है दुनिया पर राज। जो हर जगहखेल का मैदान ढूँढ लेता है,हर जगहनाचने की जगह बना

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झूठ के लिए चमकने से बेहतर है सत्य के लिए लहूलुहान होना

समाज और यथार्थ

झूठ के लिए चमकने से बेहतर है सत्य के लिए लहूलुहान होना हारअसफलता नहीं होती।सबसे बड़ी हार है—यह जानकर भीकि युद्ध योग्य है,पीठ फेर लेना। उत्कृष्ट बनने से पहलेपूछो—किसमें? तेज़ चलने से पहलेपूछो—किस दिशा में? गति बाद में आती है।दिशा पहले। गलत राह पर उड़ने से बेहतर हैसही रास्ते पररेंगना। सही चुनाव करनासही चुनाव मेंपरफेक्ट

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तुमने ही चोर को बुलाया

हिंदी कविता

तुमने ही चोर को बुलाया पहले इच्छा ने दरवाज़ा खोला,फिर चोर भीतर आया। जब चाह आग बन जाती है,तो दुनियाव्यापारी बनकर पहुँचती है—मदद के लिए नहीं,मुनाफ़े के लिए। ज़रूरतमंद ग्राहकसबसे आसान शिकार होता है।अधीर हो तुम,तो वादा कुछ भी चलेगा,और मिलेगा—कुछ नहीं। तुमने सुकून माँगा,तुम्हें शोर मिला।तुमने अर्थ चाहा,तुम्हें नक़ली जवाब मिले। फिर तुम बोले—“उन्होंने

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विचलन नहीं जीतते, कमजोर लक्ष्य हारते हैं

समाज और यथार्थ

विचलन नहीं जीतते, कमजोर लक्ष्य हारते हैं यदि लक्ष्यतुम्हें पकड़ नहीं पाता,तो दुनियातुम्हें खींच लेती है। विचलन दोषी नहीं हैं।वे बस यह बता रहे हैंकि लक्ष्यनिर्जीव है। अगर बार-बारध्यान की याद दिलानी पड़े,तो समझ लो—हृदय वहाँ नहीं है। कमजोर लक्ष्यमन को भटकने कानिमंत्रण देता है।यह समस्या नहीं,लक्षण है। ऐसा लक्ष्य चुनोजो तुम्हारी ढाल बन जाए।तुम

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न ट्रॉफी, बस खेल

मन और भावनाएँ

न ट्रॉफी, बस खेल (No Trophies, Just Play) जब भीतर पूर्ण हो,तो दुनिया सेसाथ माँगने नहीं जाते। जब भीतर पूर्ण हो,तो दुनिया सेकोई शिकायत भी नहीं रहती। तब कर्म होता है—तेज़, जीवंत,पर फल की भीख के बिना। कहते हैं जीवन कोकोई प्रेरक चाहिए।पर क्या वह प्रेरणाहीनता और कमी की भावना होनी चाहिए? हम जमा करते

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मुक्त समय का मिथक

समय और जीवन दर्शन

मुक्त समय का मिथक जीवन कोखालीपन नहीं चाहिए,उद्देश्य चाहिए,आग चाहिए। समय को बरबाद करने कासबसे आसान तरीका है—छोटी-छोटी बातों मेंमन को उलझाए रखना,सोचना,घिसटना,और वहीं फँसे रहना। जीवन ही समय है।हर क्षणअमूल्य है। हम जन्म लेते हैंशारीरिक प्रवृत्तियों की बेड़ियों में,और बड़े होते-होतेसमाज सेऔर भी जंजीरें जमा कर लेते हैं। जीवन का अर्थ है—सीख को भी

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मज़ाक के सिवा कुछ स्थायी नहीं

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

मज़ाक के सिवा कुछ स्थायी नहीं(Nothing Lasts but the Joke) किसी को“परे”,“अटल”,“सदैव”का दर्जा मत दो। यहाँकुछ भीअविनाशी नहीं। दिखाओ मुझे—जो आज जैसा हैवैसा हीकल भी रहे। दिखाओ मुझे—जो तुम्हारी उम्मीदों सेकभी विश्वासघात न करे। बुद्धिमान जानता है—स्थितियाँ खेल हैं।आज यह,कल कुछ और। वे किसी की नहीं होतीं।न वफ़ादार,न प्रतिबद्ध।क्षणिक—जुगनू की रोशनी जैसी। ध्यान से देखो—जो

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समस्या सेक्स नहीं, खालीपन है

समाज और यथार्थ

समस्या सेक्स नहीं, खालीपन है सेक्स समस्या नहीं है।समस्या है—भीतर का खालीपन। जब तुम नहीं जानतेकि तुम कौन हो,तब इच्छातुम्हें खींचती है,घसीटती है,शासित करती है। सेक्ससरल है,जैविक है।पर आसक्ति—जटिल है,मानसिक है। तुम भूखे हो,पर यह भूखदेह की नहीं।तुम्हें लगता हैसेक्स तृप्त करेगा—पर वह वादा करता है,पूरा नहीं करता। हम बिना आत्म-बोध के जीते हैं।और उसी

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पुरुष को एक ओर रखो

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

पुरुष को एक ओर रखो स्त्री के संसार का केंद्रपुरुष नहीं होना चाहिए,और पुरुष के संसार का केंद्रस्त्री नहीं। यह व्यवस्थाजंगल की है,मनुष्यता की नहीं। जब तकशरीर, हार्मोन,मातृत्व,और घोंसलाजीवन का केंद्र बने रहते हैं,मुक्तिकेवल शब्द रह जाती है। जिस दिनशरीर मालिक नहीं रहता,उसी दिनपुरुष भीआसक्ति नहीं रहता। रुको,और खुद से पूछो—जिसे तुमइतना महत्वपूर्ण मान रही

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जीवन भरो, वरना वह खुद भर जाएगा

हिंदी कविता

जीवन भरो, वरना वह खुद भर जाएगा अगर तुमअपने जीवन कोऊँचाई से नहीं भरोगे—आनंद से,बोध से,सौंदर्य से,पवित्रता से—तो जीवनखुद को भर लेगा। और वह भरेगाकचरे से। कभी नौकरी के नाम पर,कभी रिश्तों के बोझ में,कभी किसी और शोर में—जो दिखेगा ज़रूरी,पर होगा खोखला। मनुष्यआलस्य के लिए पैदा नहीं हुआ।वहसंघर्ष में जन्म लेता है।पूरा जीवनएक रणभूमि

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प्रेमहीन काम, आनंदहीन जीवन

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

प्रेमहीन काम, आनंदहीन जीवन अगर कामप्रेम योग्य नहीं है,तो जीवनजीने योग्यकैसे होगा? कामदिन की एक फ़ाइल नहीं,वहतुम्हारी पहचान की धुरी है—दिन उसी के इर्द-गिर्द घूमते हैं,सोच उसी से आकार लेती है,रिश्तेउसी की छाया में साँस लेते हैं। काम को छोटा समझनाअपने अस्तित्व केकेंद्र को नकारना है। जहाँ तुम खड़े होऔर जो तुम करते हो—उनके बीचफाँक

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