कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

शंकर छंद विधान : शिव महिमा -रमेश शर्मा

हिंदी कविता

शिव महिमा (शंकर छंद विधान) : 26 मात्रा 16,10पर यति पदान्त गुरु लघु प्रति दो चरण तुकांत।प्रस्तुत कविता शंकर छंद विधान पर आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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धनतेरस पर कविता

हिंदी कविता

धनतेरस पर कविता अमृत कलश के धारक,सागर मंथन से निकले।सुख समृद्धि स्वास्थ्य के,देव आर्युवेद के विरले।चार भुजा शंख चक्र,औषध अमृत कलश धारी।विष्णु के अवतार हैं देव,करें कमल पर सवारी।आयुर्वेद के जनक धन्वंतरि,हैं आरोग्य के देवता।कार्तिक त्रयोदशी जन्म हुआ,कृपा करें धनदेवता।पीतल कलश शुभ संकेत,देते हैं यश वैभव भंडार।आर्युवेद की औषध खोज,किया जगत का उद्धार।धनतेरस को यम

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प्रशिक्षण लेना हे संगी छत्तीसगढ़ी कविता

समाज और यथार्थ

डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। “शिक्षक दिवस मनाने का यही उद्देश्य है कि कृतज्ञ राष्ट्र अपने शिक्षक राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के प्रति अपनी असीम श्रद्धा

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विश्व कविता दिवस पर कविता – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता,

अभी और लिखने हैं इतिहास के पन्नों में

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रेंगा प्रतियोगिता : सुख व दुःख जीवन के दो रूप

प्रकृति और पर्यावरण

रेंगा प्रतियोगिता दिनांक : 13 मई 2017 सुख व दुःखजीवन के दो रूपछाँह व धूप □ प्रदीप कुमार दाश दीपकदोनों रहते साथकर्मों के अनुरूप □ मधु सिंघीसच्चे हों कर्मसब तो तेरे हाथफिर क्यों चुप □ मनीलाल पटेलप्रकृति के नियमदुःख के बाद सुख □ गीता पुरोहितहवा ने कहापतझड़ का दुखसहते रहो □ देवेन्द्रनारायण दासइसी ताने बाने

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अप्रैल फूल दिवस पर कविता

हिंदी कविता

अप्रैल फूल दिवस पश्चिमी देशों में प्रत्येक वर्ष पहली अप्रैल को मनाया जाता है। कभी-कभी इसे ऑल फ़ूल्स डे के नाम से भी जाना जाता हैं। 1 अप्रैल आधिकारिक छुट्टी का दिन नहीं है परन्तु इसे व्यापक रूप से एक ऐसे दिन के रूप में जाना और मनाया जाता है जब एक दूसरे के साथ व्यावाहारिक परिहास और सामान्य तौर पर मूर्खतापूर्ण

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हिंदी दिवस की कविता – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा ने यह निर्णय लिया कि हिन्दी केन्द्र सरकार की आधिकारिक भाषा होगी। क्योंकि भारत मे अधिकतर क्षेत्रों में ज्यादातर हिन्दी भाषा बोली जाती थी इसलिए हिन्दी को राजभाषा बनाने का निर्णय लिया और इसी निर्णय के महत्व को प्रतिपादित

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लाभ – हानि पर कविता – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता,

लाभ – हानि पर कविता – मनीभाई नवरत्न कितने लाभ और कितने हानि-मनीभाई नवरत्न बादल से गिरतीअमृत बनकर पानी।प्यास फिर बुझातीअपनी धरती रानी । फुटते कली शाखों परबगिया बनती सुहानी ।आती फिर धरा मेंनित नूतन जवानी । छम छम करतीसुनो बारिश की जुबानी ।दिल छू कर गुजरेध्वनि ऐसी रूहानी । घनघोर घटा चीरतीबिजली की रवानी।मूरत

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छत्तीसगढ़ी कविता – तरिया घाट के गोठ

नारी जीवन और संवेदना,

( यह कविता कुछ ग्रामीण महिलाओं के स्वभाव को दर्शाती है जहाँ उनकी दिखावटीपन, आभूषण प्रियता, बातूनीपन  और  कुछ अनछुए पहलू को बताने की कोशिश की गई है ।)

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छत्तीसगढ़ी कविता – जड़कल्ला के बेरा

हिंदी कविता

जड़कल्ला के बेरा -छत्तीसगढ़ी कविता आगे रे दीदी, आगे रे ददा, ऐ दे फेर जड़कल्ला के बेरा।गोरसी म आगी तापो रे भइया , चारोखुँट लगा के घेरा॥ रिंगीचिंगी पहिरके सूटर,नोनी बाबू ल फबे हे।काम बूता म,मन नई लागे, बने जमक धरे हे।देहे म सुस्ती छागय हे,घाम लागे बड़ मजा के।दाँत ह किटकिटावथे,नहाय लागे बड़ सजा

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