मिलकर पुकारें आओ -नरेन्द्र कुमार कुलमित्र
हिंदी कवितामिलकर पुकारें आओ ! फिर मिलकर पुकारें आओगांधी, टालस्टाय और नेल्सन मंडेलाया भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद और सुभाष चन्द्र बोस कीदिवंगत आत्माओं कोताकि हमारी चीखें सुन उनकी आत्माएंहमारे बेज़ान जिस्म में समाकर जान फूंक देताकि गूंजे फिर कोई आवाजें जिस्म की इस खण्डहर मेंताकि लाश बन चुकी जिस्म में लौटे फिर कोई धड़कनताकि जिस्म में
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