कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

ये मजहब क्यों है – एकता दिवश पर कविता

हिंदी कविता

ये मजहब क्यों है – एकता दिवश पर कविता ये मजहब क्यों है?ये सरहद क्यों है?क्यों इसके खातिर,लड़ते हैं इंसान ?क्यों इसके खातिर,जलते हैं मकान ?क्यों इसके खातिर,बनते हैं हैवान ?क्यों इसके खातिर,आता नहीं भगवान ?क्या करेंगे ऐसे मजहब का,जिसमें अपनों का चीत्कार है?क्या करेंगे ऐसे सरहद का,जिसमें खून की धार है?क्यों न सबका एक

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जब मैं तनहा रहता हूँ

हिंदी कविता

जब मैं तनहा रहता हूँ जब मैं तनहा रहता हूँ।खुद से बातें करता हूँ ।सुख की,दुख की ।छांव की, धुप की ।गलतियों पर सीख लेता हूँ ।कसम खाता हूँ आगे से,इन्हें ना दुहराने की ।जीत पर बधाई देता हूँ ।उत्साह बढ़ाता हूँ,नित आगे बढ़ने की ।कारनामे गढ़ने की ।मुश्किलों से लड़ने की ।एक तारा आसमाँ

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गुरु की महिमा – एन्०पी०विश्वकर्मा

हिंदी कविता

महर्षि वेद व्यासजी का जन्म आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही हुआ था, इसलिए भारत के सब लोग इस पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। जैसे ज्ञान सागर के रचयिता व्यास जी जैसे विद्वान् और ज्ञानी कहाँ मिलते हैं। व्यास जी ने उस युग में इन पवित्र वेदों की रचना की जब शिक्षा

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धनवन्तरि भगवान पर कविता

समाज और यथार्थ

धनवन्तरि भगवान ====================मंथन हुआ समुद्र का, धनवन्तरि भगवान। चौदह रत्नों मे मिले, लिए देव पहचान।। कर मे अमृत कलश था , देव -दनुज मे छोभ। पीने का नहि संवरण, कर पाये वे लोभ।।विश्व मोहिनी हाथ से, अमृत गया परोस। सुर पाये सब भाग्यवश, टूटा असुर भरोस।। अमृत औषधियाँ सभी, धनवन्तरि भगवान। व्याधिनाश हित दे गये,

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श्रीगणेश करते कृपा

हिंदी कविता

गणपति को विघ्ननाशक, बुद्धिदाता माना जाता है। कोई भी कार्य ठीक ढंग से सम्पन्न करने के लिए उसके प्रारम्भ में गणपति का पूजन किया जाता है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन “गणेश चतुर्थी” के नाम से जाना जाता हैं। इसे “विनायक चतुर्थी” भी कहते हैं । महाराष्ट्र में यह उत्सव सर्वाधिक

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शिक्षक जग विख्यात है करे राष्ट्र निर्माण

समाज और यथार्थ

डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। “शिक्षक दिवस मनाने का यही उद्देश्य है कि कृतज्ञ राष्ट्र अपने शिक्षक राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के प्रति अपनी असीम श्रद्धा

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जब तक तन में प्रान

हिंदी कविता

करो लोकहित तुम मनुज जब तक तन में प्रान देश सदा उन्नति करे ,मन में लेना ठान ।करो लोकहित तुम मनुज ,जब तक तन में प्रान ।। है स्वतंत्र यह देश है ,बनो नहीं अंजान ।निर्भर होना छोड़ तू,इसकी बन पहचान ।। जाति-पाति के भेद से ,रहो सदा ही दूर ।एक देश के लाल हो

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हिम्मत रख

हिंदी कविता

हिम्मत रख मल्लाह तूफानों के बीच में बनकर नन्हा दीप , तूफानों से लड़ रहा ।निश्चित जीत महीप , कृपा दृष्टि प्रभु आपकी ।। सफर नहीं आसान , साथी बढते ही चलो ।बहुत बड़ा तूफान , लहरों के कारण कई ।। तूफां का है शोर , अंदर हलचल है मची।डरावनी द्युति घोर , हुआ अँधेरा

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विरोधाभासपूर्ण कविता

हिंदी कविता

विरोधाभासपूर्ण कविता आर आर साहू, छत्तीसगढ़ हो न यदि संवेदना पर पीर की,मोल क्या जानोगे श्री रघुवीर की! दुष्ट दुर्योधन दुशासन हैं जहाँ,दुर्दशा है द्रौपदी के चीर की। सत्य को सूली लगाकर आज वो,छद्म पूजा कर रहे तस्वीर की। रौशनी की ओट ले फूली-फली,सल्तनत अंधेर के जागीर की। पाप को मन में छिपा तन धो

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मन का मंथन – रामनाथ साहू ” ननकी “

हिंदी कविता

मन का मंथन मंथन मानस का करो , जानो सत्य असत्य ।कहाँ गुमी हैं मंजिलें , बूझ दिशा क्या गत्य ।।बूझ दिशा क्या गत्य , लक्ष्य से कब है छूटा ।भटका अपने मूल , स्वार्थ में किसको लूटा ।।कह ननकी कवि तुच्छ , आत्म का कर अभिनंदन ।निकले सब अपद्रव्य , सफल हो मानस मंथन

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