मर गया कवि सम्मान के चक्कर में – मनीभाई नवरत्न
समाज और यथार्थवर्तमान परिस्थितियों में कवियों की सम्मान के प्रति अति मोह पर व्यंग्य करती कविता
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वर्तमान परिस्थितियों में कवियों की सम्मान के प्रति अति मोह पर व्यंग्य करती कविता
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प्रेम आधारित छोटी सी कहानी
अंजलि और प्रताप की लव स्टोरी- मनीभाई नवरत्न Read More »
मनीभाई नवरत्न की अपने मित्र अंकित भोई अद्वितीय से साक्षात्कार
मनीभाई की अद्वितीय चर्चा – साक्षात्कार विधा Read More »
बचपन को आधार मानकर लिखी गई मनीभाई नवरत्न की तांका आप के समक्ष प्रस्तुत
अल्हड़ बचपन -मनीभाई नवरत्न (तांका विधा) Read More »
सतत व्यापक मूल्यांकन पर आधारित कविता, जिसे मैंने सन् 2013 में विज्ञान प्रशिक्षण के मास्टर ट्रेनर बनने के दौरान लिखा था ताकि शिक्षकों को सतत व्यापक मूल्यांकन की उपयोगिता पता चल सके.
हिन्दी कविता: सीसीई (सतत् व्यापक मूल्यांकन) – मनीभाई नवरत्न Read More »
प्रस्तावना : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह कहना की कोरोना अमेरिका पर पर्ल हार्बर और 9/11 के आतंकी हमले से बड़ा हमला है. जो इस बात की पुष्टि करता है कि दुनिया का महाशक्ति कहलाने वाला देश कोरोना के सामने कैसे अपना घुटना टेकते नजर आ रही है. आज दुनिया में ऐसा कोई
हिन्दी निबंध : कोरोना वायरस (संकलित रचना ) Read More »
सतनाम पिरामिड रचना हेनरतज तूनशाखोरीजाति प्रपंचचोरी, व्यभिचारअसत,हिंसा,हत्याअपना सतनामकरूणा निधानदेगा सम्मानवही सच्चामहानधर्म है। #मनीभाई”नवरत्न”
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12 मई नर्स दिवस पर विशेष कविता मौत की दहलीज में ,जब कोई हो पड़े-पड़े।खून से लथपथ ,अंग भंग हो के सड़े-सड़े ।अपने तक तरस खाते,देख दूर खड़े-खड़े ।तब एक महिला ,पस-दुर्गंधों से लड़े-लड़े।अस्पताल में महत्वपूर्ण है इसकी भूमिका ।“सिस्टर”कहते सब जिसे,वो है परिचारिका। बीमारी की पहचान में डॉक्टर करता काम।पर निदान प्रक्रिया में नर्स
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विश्व दूरदर्शन दिवस पर कविता समाज का एक वर्गइतराता नहीं ये कहने से,मूल्यों के विघटन मेंदूरदर्शन का हाथ है ।पर पवित्र ना होदृष्टिकोण तोलगता है दिन भीघनघोर रात है ।। कहीं चूक है अपनी जोमित्र दूरदर्शन हो रहा दोषी ।वरना ताकाझांकी चलती सदाकि क्या कर रहा अपना पड़ोसी? ज्ञान है, विज्ञान हैमनोरंजन की खान है
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ओ नारी- मनीभाई नवरत्न जिन्दगी चले ना, बिन तेरे ओ नारी!उठा ली तूने, सिर अपने ऐसी जिम्मेदारी । मर्दों ने नाहक किये खुद पे ऐतबार ।सच तो यह है कि नारी होती जग की श्रृंगार ।महक ऐसे , फूल जैसे खिल उठे क्यारी क्यारी ।रोशन होता रहे तेरा जी, फैले ज्ञान की चिनगारी ।। संयमित
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आओं खेलें सब खेल आओं खेलें सब खेल ।बन जाओ सब रेल।छुक छुक करते जाओ ।सवारी लेते जाओ ।कोई छुट ना जाए ।हमसे रूठ ना जाए ।सबको ले जाना जरूरी ।तय करनी लम्बी दूरी ।सबको मंजिल पहुंचायेंगे ।घुम फिरकर घर आयेंगे । मनीभाई नवरत्न
चोका:- नारी तू खास है★★★★★ हर युद्ध काजो कारण बनतालोभ, लालचकाम ,मोह स्त्री हेतुपतनोन्मुखइतिहास गवाहस्त्री के सम्मुखधाराशायी हो जाताबड़ा साम्राज्यशक्ति का अवतारनारी सबला।स्त्री चीर हरण सेकौरव नाशमहाभारत कालरावण अंतसीता हरण करस्त्री अपमानहर युग का अंत।आज का दौरनारी सब पे भारीगर ठान लेदिशा मोड़े जग कासहनशीलप्रेम त्याग की देवीधैर्य की धागाबांधकर रखतीदेवों का वासतेरे आस पास