नशे की गिरफ्त में

नशे की गिरफ्त में

नशे की गिरफ्त में
स्त्री पुरुष बच्चे बूढ़े
क्लब रेस्तरां में
परोसें जा रहे
खनकती हाथों से
शराब।
रेल्वे स्टेशनों में
नंग धड़ंग
बालक
सुलेशन लगाकर
कपड़ो में सुंघ रहे हैं
अहा…
मद मस्त होकर।
कुएँ के पार बैठ
तंग गलियों में
चार लोग बैठे
भाँग चिलम के संग
लगा रहे कस।
नौजवान
शान से
उड़ा रहे 
धुएं का छल्ला
जेब में
महंगी सिगरेट।
बुजुर्ग
खरीद कर
या स्वयं द्वारा निर्मित
पल पल
फूंक रहे हैं
बीड़ी पक पक।
गुड़ाखू
दांतो में
मसूडों में,
ले रहे असर में मजा
पैखाना जाने से पहले
है जरूरी।
रगड़ कर खैनी
उड़ाकर कुछ अंश
दबा रहे होंठो में।
चरस,अफीम,ब्राउनशुगर
कफ शिरफ,इंजेक्शन
टेबलेट,डोडा ताड़ी
रम,बियर,सादा लाल
दारू,गुटका।
विवाह,षष्ठी कार्यक्रम
हर जगह मांग रहे
पार्टी और गटक रहे
जहर।
गाली,झगड़ा
निरुत्साह,गरीबी,लूट
हत्या,गुंडागर्दी
धन दौलत की बर्बादी
जवानी में मौत
नशे की जड़
नशा नशा नशा

राजकिशोर धिरही

तिलई,जांजगीर छत्तीसगढ़

पिन-495668
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

Please follow and like us:

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page