KAVITA BAHAR
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सपनो पर कविता

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सपनो पर कविता

सपनो में सितारे सजने दो,
नदियों की धाराएँ बहने दो।
शीतल हवाएँ मन की तरंगें,
फूलों की खुशबू महकने दो।

ऊँचे अरमानों को सजने दो,
आकाश में पंछी उड़ने दो।
समन्दर की ये सुहानी लहरे,
जल में मछलियाँ तैरने दो।

नजरों में नजारे रहने दो,
पलकों में चाँद उतरने दो।
बदले तो बदले ये जमाना,
हर किसी को दीवाने रहने दो।

चाँद सितारे से आगे जाने दो,
इस दुनिया को स्वर्ग बनाने दो।
छेड़ो ऐसी तान इस जीवन में,
नित होठों पे मुस्कान सजने दो।
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रचनाकार-डिजेंद्र कुर्रे “कोहिनूर”
पीपरभावना,बलौदाबाजार (छ.ग.)

मो. 8120587822

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