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आतंकवाद विरोध दिवस पर कविता -अकिल खान

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आतंकवाद विरोध दिवस पर कविता -अकिल खान


कहाँ कब क्या हो जाए ये कोई नहीं जानता,
कारण आतंकवाद के लोग अब एक दुसरे से है पनाह माँगता।
अशांति भय – डर और आतंक इस संगठन की है बुराई,
करेंगे खात्मा विश्व से इस राक्षस का,

लड़ेंगे हम आतंकवाद से लड़ाई।

अनपढ़- ज्ञानी सभी लोग हैं इसमें शामिल,
भरते जहर दिमाग में अपने बच्चों के,

बनाते उनको आतंकवाद के काबिल।
न कोई धर्म है न कोई इसका है जात,
लेकर हथियार अपने साथ फिरते झाड़ – जंगल पात – पात।
करते छल- कपट विश्वासघात ये,

क्यों करें हम इनकी भलाई,
करेंगे खात्मा विश्व से इस राक्षस का,

लड़ेंगे हम आतंकवाद से लड़ाई।

सत्य की जीत हो अधर्म का हो नाश,
इन दहशतगर्दों का हम करेंगे विनाश।
युवा पढ़ेगा इतिहास गढ़ेगा,
आतंकियों के मंसूबों से लड़ेगा।
नई तकनीकों ने, उपद्रवियों का नींदे है चुराई,
करेंगे खात्मा विश्व से इस राक्षस का,

लड़ेंगे हम आतंकवाद से लड़ाई।

सैन्य शक्ति के कारण आतंकवादी
मारे – फिरते नदी नाले- गली,
मारकर इन भेड़ियों को हो गए शहीद,

वीर- सैनिकों को सलाम – विनम्र श्रद्धांजलि।
अशांत विश्व को देख, युवा शांति का है गीत गाई,
खुनी- मंजर देख विश्व का,

युवा के बाजुओं में है ताकत आई,
करेंगे खात्मा विश्व से इस राक्षस का,

लड़ेंगे हम आतंकवाद से लड़ाई।



-अकिल खान रायगढ़ जिला – रायगढ़ (छ. ग.) पिन – 496440.

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2 Comments
  1. Akil khan says

    Thank you.

  2. वंशिका यादव अनुष्का (अनू) says

    bahut badhiya