कोशिश फिर से करते हैं

कोशिश फिर से करते हैं

kavita

आओ एक कोशिश फिर से करते हैं,
टूटी हुई शिला को फिर से गढ़ते हैं।
आओ एक कोशिश फिर से करते हैं,
हाँ, मैं मानता हूँ
इरादे खो गए,
हौसले बिखर गए,
उम्मीद टूट चुकी,
सपनों ने साथ छोड़ दिया,
हमने कई अपनों को गवाया,
अपनों से खूब छलावा पाया,
तो क्या हुआ?


अभी तक जिंदगी ने हार नहीं मानी है,
कोशिश करने की फिर से ठानी है,
आओ एक कोशिश फिर से करते हैं।
हौसलों में बुलंद जान भरते हैं,
उम्मीदों को नई रोशनी देते हैं,
सपनों को फिर निखारते हैं,
इरादों को जोड़ते हैं,
हार का मुंह तोड़ते हैं,
आओ एक कोशिश फिर से करते हैं।
जीवन में इंद्रधनुष लाते हैं,
दुनिया को खुशियाँ दे जाते हैं,
आओ फिर सपनों की उड़ान भरते हैं,
आओ एक कोशिश फिर से करते हैं।

अशोक शर्मा

बहार
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0 thoughts on “कोशिश फिर से करते हैं”

  1. शशि कांत श्रीवास्तव

    नमस्कार, हम भी आपकी इस सम्मानित संस्था से जुड़ना चाहते हैं और अपनी रचना आपके पटल पर रखना चाहते हैं?

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