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जीवन के झंझावातों में श्रमिक बन जाते है
जन-जन करोड़ों की मधुर मुसकान चाचा नेहरू /सुनील श्रीवास्तव ‘श्री’
बाल मजदूर पर कविता (लावणी छंद मुक्तक)
बाल-दिवस पर कविता / पं.जवाहरलाल नेहरू की जयंती पर कविता
बाल-दिवस पर कविता
विश्व बाल दिवस पर कविता
राजकिशोर धिरही के बेहतरीन बाल कवितायेँ
बाल भिक्षुक -आशीष कुमार
ननपन के सुरता (छत्तीसगढ़ी कविता)
अल्हड़ बचपन -मनीभाई नवरत्न (तांका विधा)
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