कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

सूरज का है आमंत्रण

हिंदी कविता

सूरज का है आमंत्रण अंधेरों से बाहर आओ,सूरज का है आमंत्रण!बिखरो न यादों के संग,बढ़ो,लिए विश्वासी मन!अतीत के पन्नों पर नूतन,गीत गज़ल का करो सृजन!भीगी आंखों को धोकर,भर लो अब तुम नवजीवन!खुशियों को कर दो ‘अर्पण’,जियो औरों की ‘प्रेरणा’बन!! -डॉ. पुष्पा सिंह’प्रेरणा’

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प्यार एक दिखावा

समाज और यथार्थ

प्यार एक दिखावा न कसमें थीं न वादे थेफिर भी अच्छे रिश्ते थेआखों से बातें होती थींकुछ कहते थे न सुनते थेन आना था न जाना थाछत पर छुप कर मिलते थेवो अपनी छत हम अपनी छतबस दूर से देखा करते थेअब कसमें है और वादे हैऔर प्यार एक दिखावा हैआखों से कुछ कहना मुश्किलहोंठ

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प्रीत की रीत

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प्रीत की रीत चंद्र गगन में आधा हो ,प्रिय से मिलन का वादा हो ,बनता है इक गीत|निस दिन अंखियां बरसी हो ,पिया मिलन को तरसीं होंबढ़ती है तब प्रीत|जब सारी रस्में निभानीं हो,छोटी जिंदगानीं हो,सजती है तब  प्रीत की रीत|सपनें देखें संग संग में ,प्यार पले दोनों मन में ,बनते तब वे सच्चे मीत|दिल

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तीन ताँका – प्रदीप कुमार दाश

हिंदी कविता

तीन ताँका नेकी की राहछोड़ते नहीं पेड़खाये पत्थरपर देते ही रहेफल देर सबेर । जेब में छेदपहुँचाता है खेदसिक्के से ज्यादागिरते यहाँ रिश्तेअचरज ये भेद । डूबा सूरजडूबते वक्त दिखारक्तिम नभलौट रहे हैं नीड़अनुशासित खग ।        ~ ● ~ □ प्रदीप कुमार दाश “दीपक”

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प्रजातंत्र पर कविता

समाज और यथार्थ

प्रजातंत्र पर कविता जहरीला धुंआ है चारो ओर,मुक्त हवा नहीं है आज,पांडव सर पर हाथ धरे हैं,कौरव कर रहे हैं राज! समाज जकड़ा जा रहा है,खूनी अमरबेल के पंजों में,नित्य फंसता ही जा रहा है,भ्रष्टाचार के शिकंजों में! आतंक का रावणअट्टहास कर रहा है,कहने को है प्रजातंत्र,अधिकारों का हनन,कोई खास कर रहा है! शासन की

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सुनो एक काम करते हैं

हिंदी कविता

सुनो एक काम करते हैं सुनो एक काम करते हैं दोनों भाग जाते हैंचलेंगे उस जगह पे हम जहां सब मुस्कुराते हैंबहारों का हंसी मौसम जहाँ हर रोज़ रहता होपपीहे पीहू पीहू के जहाँ पे गीत गाते हैं दूर तक फैला हो अम्बर क्षितिज सा इक नज़ारा होबीच खेतों के सुंदर सा वहीं इक घर

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उषा सुहानी लगे प्यारी

हिंदी कविता

उषा सुहानी लगे प्यारी उषा सुहानी लगे प्यारी मंद पवन की ठंडक न्यारी घोंसला छोड़ पंछी भागे उषाकाल नींदों से जागे ।            कोयल की सुन मीठी वाणी            छुप छुप किया करे मनमानी             शीतल मंद पवन मदमाती             रवि किरण तन -मन को लुभाती। कोहरा आकाश धुँधलाता । हरा भरा तृण उर लुभाता।

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स्वामी विवेकानंद

स्वामी जी आपको करते हैं नमन

हिंदी कविता

स्वामी जी आपको करते हैं नमन स्वामी जी आपको करते हैं नमनस्वीकार कीजिए श्रद्धा सुमन वेदों का पाठ सारे जग को पढ़ायादुनिया में भारत का मान बढ़ायाशिकागो का यादगार सम्मेलनस्वामी जी आपको करते हैं नमन युवाओं को बढ़ने का मार्ग बतायादीन-दुखियों को गले से लगायासेवा में अर्पित किया जीवनस्वामी जी आपको करते हैं नमन रामकृष्ण

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निंदा पर सोरठा- मनीभाई

हिंदी कविता

निंदा पर सोरठा चुगली औषधि होत, करती मरहम काम जो।परनिंदा दुख स्रोत ,        स्वनिंदा बैकुंठ सम।।✒️ मनीभाई ‘नवरत्न’

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कुछ पल तुम्हारे साथ

हिंदी कविता

कुछ पल तुम्हारे साथ कुछ पल तुम्हारे साथ,बीते लम्हें मेरे साथ,उन यादों को सुन्दर रूपहले,आंचल में समेट कर,चारों तरफ से उसे ओढ़ लेती हूं,और महफूस-महसूस, करती हूं।कितनी बातें तुम्हारे साथ,कितनी यादें तुम्हारे साथ,उन यादों में लड़ना झगड़ना,और खुद से ही शरमा जाना। कितनी मीठी बातें तुम्हारी,कितनी यादें प्यार भरी ,गुनगुनी धूप सी अलसाई सी,वहां से

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स्वामी विवेकानंद

हे युवा उठो चलो जागो

हिंदी कविता

हे युवा उठो चलो जागो कितनी बातें लिखेंगे??कितनी…. ईमानदारी से।डीजिटल हुई भावनाएँ,इंटरनेट की पहरेदारी से। कुछ बंधक है कुछ ग्रस्त,कुछ तो.. फसे भारी त्रस्त।जाने चहरे की वेदनाएँ क्यों,स्टेट्स के रास्ते गई व्यस्त। किसे फर्क पड़ता,कौन??किसने परोसा है आघात वज्र।युवा क्रांति लुप्त ना हो जायें,सोशल मीडिया क्षरण है बज्र। कुछ तो योग हो,कुछ ध्यान,हिमालय से उच्च

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प्रिय का अनुपम श्रृंगार

हिंदी कविता

प्रिय का अनुपम श्रृंगार चंदन, कालीयक, अंगरू, सुगंध मिल,क्या खूब बना है अंगराग।स्नान के जल पुष्प से सुरभित,लो कर लिए तुमने जलविहार,देख मेरा मन बोल उठा अब,प्रिय का अनुपम श्रृंगार ।। केसर,कमल,मंदार,शिरीष सब,शरीर की सज्जा बढ़ाती है,मुंह सुगंधित करने को तूम,तांबुल, पान जो खाती है,कानों में शोभित है झुमके,शोभ रहा नौलखा हार,देख मेरा मन बोल

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